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सिनेमा अब सिर्फ उत्पाद है : शेखर

प्रख्यात फिल्मकार शेखर कपूर कहते हैं कि इन दिनों सिनेमा को बेचने के लिए जिस तरह से प्रचार किया जाता है, उसे देखते हुए अब यह सिर्फ एक उत्पाद बनकर रह गया है। शेखर के निर्देशन में बनी अंतिम हिंदी फिल्म 'बैंडिट क्वीन' 1994 में प्रदर्शित हुई थी।

शेखर ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा कि मैं दूसरी फिल्म क्यों नहीं बनाता। इसकी वजह यह है कि रचनात्मकता एक गहरी और अंतरंग बात है लेकिन आजकल फिल्मों में पैसा लगाने वाले सोचते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं। अब फिल्मों के प्रचार पर हमेशा से ज्यादा पैसा खर्च किया जा रहा है। फिल्मों को एक उत्पाद के रूप में देखा जाता है न कि रचनात्मक कार्य के रूप में।

उन्होंने कहा कि फिल्में सिर्फ पैसे का मसला होकर रह गई हैं। आप एक गम्भीर सिनेमा कैसे बना सकते हैं जबकि उसे बेचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कौनसी अभिनेत्री आइटम नंबर कर रही है। अब सिनेमा एक उत्पाद बन गया है।

शेखर को 'मासूम' व 'मि.इंडिया' जैसी फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने हॉलीवुड में 'एलिजाबेथ', 'द फोर फीचर्स' और 'एलिजाबेथ: द गोल्डन एज' जैसी फिल्में बनाईं। वह बीते लम्बे समय से अपनी नई फिल्म 'पानी' पर काम कर रहे हैं। यह फिल्म पानी के लिए होने वाले युद्धों पर आधारित है।

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