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घर में तो बच्चों डॉन हैं मैं नहीं शाहरुख

बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान की दो ही इच्छाएं हैं पहली यह कि वे भी रितिक रोशन की तरह सुपर हीरो के रूप में बच्चों के चहेते बन जायें, खासकर अपने बच्चों की नजरों में, और दूसरी है कि डॉन सीरीज की फिल्में उनके नाम से पहचानी जायें।

डॉन और डॉन 2 में फर्क?
काफी फर्क है। दरअसल पहली डॉन को चाहकर भी हम अमित जी की डॉन के प्रभाव से मुक्त नहीं कर पाये थे। क्योंकि अमित जी ने जो दोहरी भूमिका डॉन में निभाई थी, लगभग उसी को हमने फॉलो किया था। लेकिन इस बार हमने काफी कुछ नया किया है। लिहाजा इस बार 'डॉन-2' का डॉन अपने मापदंड खुद तय करता दिखाई देगा।

जैसे कि, थोड़ा खुलकर बताएं?
ढेर सारी बातें हैं जो अभी करना फिल्म के लिए ठीक नहीं होगा, फिर भी, इस बार डॉन काफी मेच्योर है, वो रोमांस भी करता है, लेकिन उसका अंदाज अलग है। दूसरे उसे सम्मानजनक शब्द पसंद नहीं, फिल्म में वो बोलता भी है कि मुझे सर ना बोला जाये, क्योंकि इसमें सम्मान का अहसास होता है, मुझे सिर्फ डॉन कह कर संबोधित किया जाये।

क्या वजह है कि 'डॉन 2' का प्रचार, आपकी पिछली फिल्म 'रा.वन' के मुकाबले काफी धीमा चल रहा है?
मुझे तो ऐसा महसूस नहीं हुआ, क्योंकि आज हर चैनल पर इस फिल्म के प्रोमो खूब दिखाई दे रहे हैं। दूसरे मैं इस फिल्म का निर्माता नहीं बल्कि हीरो हूं, लिहाजा इस बारे में तो फरहान अख्तर जो इस फिल्म के निर्माता-निर्देशक हैं, वही बता सकते हैं कि उन्होंने प्रचार की क्या योजना बनाई है।

कहा जाता है कि डॉन सीरीज आपके काफी करीब है?
कुछ भूमिकाएं होती हैं ऐसी, जो कलाकार के बहुत करीब होती हैं, पता नही क्यों, डॉन शुरू से मुझे बहुत प्रभावित करता रहा है। और मैं ही नहीं, शूटिंग के दौरान फिल्म से जुड़े हर अभिनेता और अभिनेत्री अपने पात्रों में भीतर तक घुसे हुए थे। जहां तक मेरी बात है तो मैं चाहता हूं, कि इस फिल्म से डॉन के रूप में मुझे एक स्वतंत्र पहचान हासिल हो।

आपकी एक और इच्छा सुपर हीरो के तौर पर बच्चों के बीच अपनी खास पहचान बनाने की भी रही है। क्या 'रा.वन' से वो पहचान बनाने में सफल हो पाये?
आप बताइये, कि मैं कितना सफल रहा? जहां तक मेरी बात है तो मैं कहूंगा कि 'रा.वन' से बच्चों के बीच थोड़ी सी इज्जत बनाने में तो जरूर कामयाब हुआ हूं, खासकर अपने बेटे आर्यन की नजरो में, लेकिन मेरी बेटी मुझे हर गेटअप में पसंद करती है।

बॉलीवुड में अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में क्या सोचते हैं?
मुझे लगता है कि मैं तो पैदा ही हुआ एक्टर बनने के लिए, क्योंकि इसके अलावा मुझे कुछ और आता ही नहीं, और जो शोहरत मुझे हासिल है, उसका मैं अपने आपको वाकई दावेदार मानता हूं। मेरी इच्छा है कि हमेशा मेरी यही पहचान बनी रहे, और मैं मरूं भी तो, एक्टिंग करते हुए ही।

अपने घर में डॉन की क्या हैसियत है?
अरे, घर में मेरी हैसियत सबसे कम है, वहां तो मेरे बच्चे मुझसे बड़े डॉन हैं, वे कोई फरमाइश करें, क्या मजाल कि मैं उसे पूरा ना करूं।

अगले साल के लिए क्या कुछ योजनाएं हैं?
दरअसल मेरा 2010 काफी स्लो रहा था, और 2011 में मैं 'रा.वन' में ही व्यस्त रहा। लेकिन अब मुझे लग रहा है कि मैं अब कुछ ज्यादा काम करूं, साल में दो की जगह चार फिल्में करूं, ऐसी फिल्में बनाऊं, जो अभी तक ना बनी हों। इसके अलावा अगले साल यश चोपड़ा के साथ फिल्म शुरू होगी। सालों हो गए उनके साथ काम किए, दरअसल उनकी फिल्में हमेशा मेरे लिए एक गिफ्ट की तरह होती हैं। 

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