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ऑस्ट्रेलिया के हर दौरे में सैकड़ा जड़ा है तेंदुलकर ने

पिछले नौ महीनों से भी अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक पूरा करने से चूकने वाले सचिन तेंदुलकर संभवत: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी चार टेस्ट मैचों की सीरीज में यह इंतजार खत्म करने में सफल रहेंगे क्योंकि अपने 22 साल के करियर में वह जब भी ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गए तब उन्होंने वहां सैकड़ा जरूर जड़ा।

तेंदुलकर को महाशतक पूरा करने के लिए केवल एक शतक की दरकार है। उन्होंने आखिरी शतक इस साल 12 मार्च को विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगया था लेकिन तब से वह 17 पारियों में तिहरे अंक में पहुंचने में नाकाम रहे। इस स्टार बल्लेबाज को हालांकि 18 साल की उम्र से ही ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर लंबी पारियां खेलने का अच्छा खासा अनुभव है जिसका फायदा वह 26 दिसंबर से मेलबर्न में शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज में उठाना चाहेंगे।

तेंदुलकर ने अब तक चार बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया है और हर बार वह कम से कम एक शतक लगाने में जरूर सफल रहे हैं। उनके अलावा वर्तमान भारतीय टीम में वीवीएस लक्ष्मण ही ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के अपने प्रत्येक दौरे में सैकड़ा जमाया।

तेंदुलकर पहली बार 1991-92 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गए थे और तब उन्होंने सिडनी में नाबाद 148 और पर्थ में 114 रन की बेहतरीन पारी खेली थी। भारत पर्थ टेस्ट में हार गया था लेकिन उनकी इस पारी का आज भी सर्वश्रेष्ठ पारियों में आंका जाता है। तेज गेंदबाजों के अनुकूल वाका पिच पर खेलना आसान नहीं था। भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर, नवजोत सिंह सिद्धू, जवागल श्रीनाथ और लक्ष्मण ने तो तेंदुलकर के इन 114 रन को उनका सर्वश्रेष्ठ शतक आंका था।

मांजरेकर भी उस मैच में खेल रहे थे और उन्होंने बाद में इस शतक के बारे में कहा था कि मुझे याद है कि मैं कुछ देर के लिए भूल गया था कि मैं टीम का सदस्य हूं। मैं ड्रेसिंग रूम से बाहर आम क्रिकेट प्रेमी की तरह उस पारी को देखने लगा। तेंदुलकर तब अपने करियर के शुरुआती दौर में थे लेकिन उस शाम को उन्होंने अपनी महानता की पुष्टि कर दी थी।

तेंदुलकर ने इस दौरे में पांच मैच में दो शतकों की मदद से 368 रन बनाए थे। इसके बाद वह 1999-2000 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गए और तब उन्होंने तीन मैच में 278 रन बनाए। इनमें मेलबर्न में खेली गई 116 रन की पारी भी शामिल है। द्रविड़ इसे तेंदुलकर का सर्वश्रेष्ठ शतक आंकते हैं।

द्रविड़ ने इस शतक के बारे में कहा था कि यह निश्चित तौर पर मुश्किल विकेट नहीं था लेकिन एमसीजी के माहौल और बिना किसी सहयोग के बल्लेबाजी करना लाजवाब था। कप्तान होने के कारण उन पर काफी दबाव था और ऐसे में शानदार शतक जमाने का वास्तव में कोई जवाब नहीं था।

भारतीय टीम 2003-04 में जब ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गई तो तेंदुलकर पहले तीन मैच में रन बनाने के लिए तरस गए थे। इन तीन मैच की पांच पारियों में वह केवल 82 रन बना पाये थे। जब टीम चौथा मैच खेलने सिडनी पहुंची तो उन पर काफी दबाव था लेकिन तेंदुलकर ने एससीजी पर पहली पारी में नाबाद 241 और दूसरी पारी में नाबाद 60 रन बना दिए थे। इस तरह से उस दौरे में उनके नाम पर 383 रन दर्ज हुए थे।

तेंदुलकर का नाबाद 241 रन का स्कोर तब उनका टेस्ट क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर था। अनिल कुंबले ने एक बार उनकी इस पारी का तब की परिस्थितियों में जिक्र किया था। कुंबले ने कहा था कि सिडनी की पारी से पहले वह सीरीज में ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंदों पर आउट हो रहे थे और उन्होंने फैसला किया कि आगे ऐसा नहीं होगा। उन्होंने आफ साइड पर कोई बाउंड्री नहीं लगायी और कवर ड्राइव भी नहीं लगाया। वह चाहते थे कि गेंद उनके पास आए और वह उसे मिडविकेट पर खेल रहे थे और इस तरह से उन्होंने शतक नहीं बल्कि दोहरा शतक जमाया।

ऑस्ट्रेलिया के 2007-08 के दौरे में तेंदुलकर ने चार टेस्ट मैच में 493 रन बनाए। जिसमें सिडनी में नाबाद 154 और एडिलेड में 153 रन की पारी शामिल है। अब भारत को ऑस्ट्रेलिया में चार मैच खेलने हैं जिनमें से तेंदुलकर के प्रिय मैदान मेलबर्न में पहला और सिडनी में दूसरा मैच खेला जाएगा। तेंदुलकर ने मेलबर्न में एक शतक लगाया है जबकि सिडनी में उन्होंने तीन सैकड़े जमाए हैं।

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