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क्रिकेट से दूर जिंदगी के बारे में नहीं सोच सकता

क्या आपने कभी क्रिकेट के बिना जिंदगी के बारे में सोचा है?
नहीं! जैसा कि मैंने पहले भी कहा था कि जब मैं चोटिल होता हूं तो मेरे लिए खेल से दूर होना मुश्किल हो जाता है। मैंने पांच साल की उम्र में खेलना शुरू कर दिया था। इसके बाद के 32-33 सालों में मैंने क्रिकेट खेलने के अलावा कुछ नहीं किया है। क्या मैंने ऐसा नहीं किया है। क्रिकेट के इतिहास में मैने महान गेंदबाजों की चार पीढ़ियों का सामना किया है। क्रिकेट से दूर की जिंदगी के बारे में सोचना मेरे लिए बेहद कठिन है। मैं खेल से प्यार करता हूं। मैं खेल को खेलना और भी पसंद करता हूं। खेल को खेलते रहने से मुझे बहुत मजा आता है।

क्या 99वें शतक के बाद की 33 पारियों में कोई समय ऐसा भी आया जब खुद पर से विश्वास डिगा हो?
कभी नहीं। मैं जानता था कि ये शतक तो बनेगा ही। मैं लगातार नेट्स पर मेहनत कर रहा था। मेरी ओर से प्रयास और लगन में कमी नहीं थी।

ढाका हमेशा से ही आपका फेवरिट रहा है। आपने यहीं बंगबंधु स्टेडियम में दिसंबर 2004 में अपना 34 वां टेस्ट शतक भी लगाया था?
हां, ऐसा करके मैं बहुत खुश था। सच बात ये है कि मैं सुनील गावस्कर के 34 शतकों के रेकार्ड की बराबरी करके बहुत सम्मानित महूसस कर रहा था। जब हमने खेलना शुरू किया तो 34 शतकों का ये रेकार्ड बल्लेबाजों के लिए बहुत खास और यादगार था। मैंने कभी इसकी बराबरी की बात सोची ही नहीं। जब मैंने इसकी बराबरी की तो स्थिति करीब सौवें शतक जैसी ही थी। मुझे लगातार इस शतक की याद दिलाई जा रही थी, सौवें शतक सरीखा सा ही दबाव तब भी था। तब भी कुछ कुंठित कर देने वाले दिन 33वें शतक और 34वें शतक के बीच आये थे। इसलिए जब मैने वो शतक बनाया तो काफी राहत महसूस की। मिस्टर गावस्कर ने मैदान पर ही आकर बधाई देकर इसे और खास बना दिया।

आप हमेशा कहते थे कि आपने कभी टारगेट बनाना पसंद नहीं किया। लेकिन जब आप युवा थे और ये सब नहीं हुआ था, तब क्या आपने देश के लिए खेलने से पहले कोई टारगेट तय नहीं किया था?
देश के लिए इंटरनेशनल स्तर पर खेलना हमेशा से मेरे लिए सपना था। मैंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट 15 साल की उम्र में खेलनी शुरू की, वह भी एक सपना ही था। ऐसा नहीं था कि तब मैने कोई टारगेट तय किया हो। ये दरअसल एक सपने का पीछा करने की तरह था। मैं केवल टेस्ट क्रिकेटर बनना चाहता था।
और अब वह बॉय 188 टेस्ट मैच खेल चुका है, इतिहास में किसी भी क्रिकेटर से ज्यादा..
जब आप देश के लिए 21 सालों से कहीं ज्यादा समय से खेल रहे हो, तो कुछ रेकार्ड्स टूटते हैं, कुछ उपलब्धियां आपके हिस्से में आती हैं। आज भी अगले टेस्ट मैच को खेलने की संभावना ही मुझको रोमांचित करती है। मैं टास से पहले खुद को रोमांच में पाता हूं। निश्चित रूप से बीतते समय के साथ मैच्योर हुआ हूं, लेकिन क्रिकेट खेलना आज भी मेरे लिए सबसे बड़ा आनंद है। जब कुछ चोटों के कारण मुझे क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था, तो मुझे वाकई उन दिनों से नफरत थी।

आपके चमकदार क्रिकेट करियर में, आप हमेशा रनर लेने के खिलाफ रहे, इसका कोई खास कारण?
नहीं। ऐसा मैंने पूरी तरह क्रिकेटीय कारणों से किया, क्योंकि ये केवल मैं जानता हूं कि मैंने गेंद कितनी तेजी से हिट की, इसे किस गति से किधर की ओर जाना चाहिए। एक बल्लेबाज गेंद को हिट करने के लिए रन के लिए दौड़ने वाला बेस्ट जज होता है, न की रनर। मैं इस मामले में कभी कोई रिस्क नहीं लेता। मेरे लिए क्रिकेट एक धर्म है। मैं चाहता हूं कि जिन छह-सात घंटे मैं मैदान पर हूं, अपना बेस्ट दूं। इससे न कुछ कम और न ज्यादा।

क्या आप खुद को ऐसे एंटरटेनर के रूप में देखते हैं जो उन लोगों के प्रति कुछ भार महसूस करता है जो पैसा खर्च कर आपको देखने आते हैं?
फैन्स हमारे सबसे समर्थक होते हैं। उनके बिना यह खेल चल ही नहीं सकता। उनकी वजह से ही क्रिकेट ने भारत में इन ऊंचाइयों को छुआ है। लेकिन सच कहूं तो जब मैं मैदान पर खेल रहा होता हूं तो उस समय मेरे दिमाग में कुछ और नहीं बस टीम का हित ही होता है। अगर बल्लेबाजी करते हुए मैं समर्थकों को ध्यान में रखूं तो इससे एकाग्रता भंग होगी। मुझे अपना वो कार्य करना होता है जो मुझे मिला है और देश के लिए सर्वश्रेष्ठ करना चाहता हूं। इसके लिए बड़ी एकाग्रता की जरूरत होती है। इसलिए मैं इस बारे में नहीं सोच सकता कि बाहर क्या हो रहा है।

एक सचिन तेंदुलकर बनने के लिए किन चीजों की जरूरत है?
पहले आपको सपना देखना होगा। समपर्ण, अनुशासन और खेल के प्रति निष्ठा अन्य चीजे हैं। आपको खेल का अच्छा विद्यार्थी बनना होगा, जो शायद मैं उस समय नहीं था जब मैंने खेलना शुरू किया था। मैं उस दिन को अब भी याद रखे हुए हूं जब मेरा भाई अजित मुझे अचरेकर के स्कूल में ले गया था। अगर मुझे वहां न ले जाया जाता तो मैं सचिन न बना होता! मैंने अपने परिवार में काफी कुछ सीखा है। मेरे माता-पिता, मेरे बच्चों और पत्नी से मैंने बहुत सीखा है। मुझे लगता है कि इन्होंने मुझे सबसे बेहतरीन शिक्षा दी है।
(पीएमजी)

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