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सौवें शतक के बारे में नहीं सोच रहे तेंदुलकर

दुनिया भर के क्रिकेटप्रेमियों को भले ही सचिन तेंदुलकर के 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक का इंतजार हो लेकिन वह इस हाइप की परवाह किए बिना अपने खेल का मजा लेना चाहते हैं।

तेंदुलकर ने चैनल नाइन को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह कहना आसान है। यह एक आंकड़ा ही तो है, लेकिन इससे काफी हाइप जुड़ी हुई है। मैं अपने खेल का मजा लेना चाहता हूं जो अहम है। उन्होंने कहा कि इस सीरीज में भी फोकस अच्छा प्रदर्शन करके जीतने पर होगा।

तेंदुलकर ने 99वां अंतरराष्ट्रीय शतक पिछले साल मार्च में विश्व कप के दौरान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाया था। उन्होंने आखिरी टेस्ट शतक भी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले साल केपटाउन में बनाया था।

मैच की तैयारी के बारे में पूछने पर तेंदुलकर ने कहा कि वह मैच से बहुत पहले तैयारी शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं मैच की पूर्व संध्या पर अपना सामान बांधता हूं। मेरे लिए तैयारी एक हफ्ता पहले ही शुरू हो जाती है और यदि मैचों के बीच समय नहीं हो तो सब कुछ बहुत जल्दी करना पड़ता है।

तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगभग सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं लेकिन इस चैम्पियन बल्लेबाज ने कहा कि जब से उसने बल्ला उठाया है, यह सफर यादगार रहा है और क्रिकेट से उनका प्यार पहले की तरह बना हुआ है। तेंदुलकर ने कहा कि मुझे याद नहीं पड़ता कि पहली बार मैंने बल्ला कब उठाया था। मैं शायद चार या पांच बरस का था। भारत में दूसरे बच्चों की ही तरह मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया।

उन्होंने कहा कि बल्ला पकड़कर गेंद को पीटना बहुत मजेदार लगता है। क्रिकेट के लिए यह जुनून समय के साथ बढ़ता गया। यह सफर यादगार रहा है और क्रिकेट से मेरा बेइंतहा प्यार बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के पहले अनुभव के बारे में तेंदुलकर ने कहा कि वह यादगार अनुभव था। मैं 15 रन बनाकर आउट हो गया। शायद उस स्तर पर खेलने के लिए मैं काबिल नहीं था। मैं दूसरे मौके का इंतजार कर रहा था।

पिछले दो दशक से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे तेंदुलकर ने कहा कि उनके जीवन का सबसे यादगार पल वह था जब स्कूली स्तर पर शानदार प्रदर्शन के कारण अखबार में पहली बार उन्होंने अपना नाम पढ़ा। उन्होंने कहा कि मैं 11 बरस का था और मैंने कुछ रन बनाए थे। मैंने पहले मैच में 24 रन बनाए थे और इसके बाद भी कुछ मैचों में अच्छा खेल दिखाया। अखबार में मेरा नाम कई बार छपा। मेरे पहले शतक से जिंदगी बदल गई और वह मैं कभी नहीं भूल सकता।

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  • Web Title:सौवें शतक के बारे में नहीं सोच रहे तेंदुलकर