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राजकोषीय घाटे से बढ़ रहा है मुद्रास्फीतिक दबाव

भारतीय रिजर्व बैंक गुरुवार को जारी मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में कहा कि राजकोषीय घाटे को विश्वसनीय तरीके से कम करने की मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
    
आरबीआई ने कहा कि मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा में संकेत दिया था कि राजकोषीय घाटा लक्ष्य से ज्यादा होने के कारण मुद्रास्फीतिक दबाव बढ़ रहा है। इसलिए राजकोषीय घाटे को विश्वसनीय तरीके से कम करना मुद्रास्फीतिक दृष्टिकोण को अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
   
रिजर्व बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति अब तक अनुमान के मुताबिक रही है। हालांकि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने, राजकोषीय घाटे के अनुमान से अधिक बढ़ने की आशंका और एपए में कमजोरी के कारण मुद्रास्फीति में तेजी का खतरा बढ़ा है।
   
उल्लेखनीय है वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.6 फीसदी के बराबर रहने का अनुमान जाहिर किया गया था। हालांकि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद और अन्य संस्थाओं ने समीक्षाधीन अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा बढ़कर 5.6 फीसदी तक होने की आशंका जाहिर की है।
   
सर्वोच्च बैंक ने कहा कि ईंधन, उर्वरक और बिजली क्षेत्र की कीमतों को कत्रिम रूप से कम किया गया आंकड़ा सामने आता है क्योंकि इन क्षेत्रों में नियंत्रित कीमत के कारण उत्पादन लागत का वास्तविक आंकड़ा स्पष्ट नहीं होता।
   
सर्वोच्च बैंक ने अपनी समीक्षा में कहा कि वित्त वर्ष 2011-12 (अप्रैल-जनवरी) के दौरान केंद्र की राजकोषीय स्थिति और खराब हुई है क्योंकि राजकोषीय घाटे मुख्य संकेतक पूरे साल के बजटीय अनुमान को पार कर गए हैं।
   
आरबीआई ने कहा कि कर संग्रह में कमी के अलावा सरकार के गैर नियोजित व्यय विशेष तौर पर सब्सिडी में भारी बढ़ोतरी हुई है।

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