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बदलते रिश्ते संभालें हंसते-हंसते

जिंदगी पल-पल रंग बदलती है और पल-पल बनते-बदलते हैं रिश्ते। बनते-बदलते रिश्तों को कैसे संभालें, बता रही हैं वंदना अग्रवाल

शोभित और आस्था कल तक दोस्त थे। पर अब शोभित उसका जेठ हो गया है। आस्था ने शोभित के छोटे भाई से शादी कर ली। प्रोफेशनल रिश्ता अब पारिवारिक रिश्ते में तब्दील हो गया है। रिश्ते में आए इस बदलाव ने दोनों के व्यवहार में व्यापक बदलाव ला दिया। पहले दोनों का ज्यादातर समय ऑफिस गॉसिपिंग में बीतता था। पर अब दोनों बातचीत के दौरान दूरी बरतते हैं। एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी समझते हैं। परेशानियों पर ज्यादा गंभीरता से चर्चा करते हैं।

रिश्ते में आए इस बदलाव ने दोनों के लाइफ स्टाइल को बदल दिया है। पर यह बदलाव काफी सकारात्मक है, क्योंकि दोनों रिश्ता बदलने से आने वाले बदलावों के लिए पहले से तैयार थे। इसलिए एक-दूसरे की निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। पर कई लोग ऐसे होते हैं, जो रिश्ते में आए बदलावों को ठीक से स्वीकार नहीं कर पाते। परिणाम स्वरूप दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। बनते रिश्ते, बिगड़ने लगते हैं। अगर आपकी जिंदगी में रिश्तों का यह बदलाव अचानक आया है, तो इन बदलावों को ले कर सहज रहें।

बदलता है व्यवहार: हर रिश्ते की अपनी जिम्मेदारी, अपनी मांग होती हैं। ऐसा संभव नहीं होता कि पहले आप दोस्त के रूप में जो व्यवहार करते थे, वह रिश्तेदार बनने पर भी कर सकें। जैसे आस्था पहले शोभित से दोस्ताना व्यवहार कर लेती थी। हल्का-फुल्का मजाक भी कर लेती थी, पर अब वैसा व्यवहार नहीं कर सकती है। शोभित उसका जेठ हो गया है और इस नाते वह उससे पर्याप्त सम्मान की आकांक्षा करता है। वह चाहता है कि जरूरत पड़ने पर आस्था उसके लिए खाना बनाए। नाम ले कर पुकारने के बजाय भइया कह कर संबोधित करे। जरूरी मसलों पर उसके साथ विचार-विमर्श करे। इसी तरह आस्था भी चाहती है कि शोभित उसे छोटा समझ कर पर्याप्त प्रेम दे। बड़प्पन से बात करे। कोई गलती होने पर प्रेम से समझाए। दिक्कत-परेशानी में बिना किसी अपेक्षा के न केवल मदद करे, बल्कि भावी समस्याओं के प्रति आगाह भी करे।

हर रिश्ते की अलग-अलग जरूरतें: हर रिश्ते की जरूरत अलग होती है। कहीं आपको बड़प्पन निभाना होता है, तो कहीं छोटा बनना पड़ता है। अपने रिश्ते की जरूरत को समझों तथा उसी के अनुरूप व्यवहार करें। इससे आपके आस-पास और आपसे जुड़े लोगों को भी आसानी होगी। वैसे भी घर की चारदीवारी के अंदर आप अपने अपनों से जैसा बर्ताव करती हैं, सबके सामने वैसा नहीं कर पाते। हर रिश्ते हमेशा सहजता से निभाएं, ताकि आपका व्यवहार बोझ ना लगे।

कहां आती है दिक्कत
बदलते व्यवहार को बर्दाश्त करना मुश्किल होता है। जैसे रोहित की बहन ने उसके दोस्त से शादी कर ली। रिश्ता बदल गया। परेशानी यह कि रोहित अब भी आतिश से तू तड़ाक करके बात करता है, जो उसकी बहन को अच्छा नहीं लगता। एक दिन उसने सबके सामने रोहित को ऐसे व्यवहार के लिए टोक दिया। रिश्ते में खटास पड़ गई। मुश्किल से उनके बीच रिश्ता ठीक हुआ।

क्या करें
दोस्तों के बीच तू-तड़ाक, रूठना-मनाना आम बात है, पर जब ये दोस्ती रिश्तेदारी में बदले तो बातचीत के अंदाज में बदलाव लाएं।
हमेशा विनम्रता से अपनी बात रखें। बातचीत के दौरान तल्ख न हों। कोई बात चुभ भी रही है तो बहस की बजाय सहजता से अपनी बात समझाएं।
रिश्ते की संवेदनशीलता समझों और उसी के मुताबिक व्यवहार करें।
पुराने व्यवहार को सिर्फ याद करें। उन्हें वर्तमान में न दोहराएं। छोटी-मोटी बातों को नजरअंदाज करें।

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