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दलीय भेदभाव छोड़ जनता की उम्मीदें पूरी करें : राज्यपाल

झारखंड विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को शुरू हुआ। राज्यपाल डा. सैयद अहमद ने विधानसभा में अपना पहला भाषण देते हुए विधायकों का आह्वान किया कि वे दलीय भेदभाव भुलाकर राज्य की सादगी से भरी, मासूम, ईमानदार और मेहनती आवाम के ख्वाबों, ख्वाहिशों और उम्मीदों को पूरा करने में एकजुट हो जाएं।

राज्यपाल ने विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि देश और राज्य में लोकतंत्र की खूबसूरत तसवीर और सुनहरा भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि सदन के भीतर और बाहर इस पावन सदन के सदस्यों का आचरण और व्यवहार कैसा है। डा. अहमद ने कहा कि मुङो पूरा यकीन है कि आप अपने संयत व्यवहार और गरिमापूर्ण आचरण से इस सदन की गरिमा और शान को बनाए रखेंगे।

राज्यपाल ने लगभग 50 मिनट के अपने लंबे भाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए आनेवाले नए वित्तीय वर्ष की नई योजनाओं  की तसवीर पेश की। राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने बीच में टोका-टाकी भी की। वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भाषण की समाप्ति के बाद मेजें थपथपाकर स्वागत किया।

विधानसभा का सत्र पूर्वाह्न 11 बजे स्पीकर सीपी सिंह के प्रारंभिक भाषण के साथ शुरू हुआ। 11.35 बजे राज्यपाल का सदन में आगमन हुआ। राज्यपाल ने झारखंड की अर्थव्यवस्था का विशेष उल्लेख करते हुए आर्थिक विकास दर में 11 फीसदी तथा योजना मद में 62 फीसदी की बढ़ोतरी को सरकार की उपलब्धियों के मील का पत्थर बताया।

राज्यपाल ने पंचायत चुनाव और राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन की भी चर्चा की और इसे राज्य सरकार के लिए गर्व का विषय कहा। डा. अहमद ने कहा कि राज्य में 11 वीं पंचवर्षीय योजना के वित्तीय वर्ष 2011-12 के अंत तक 58.36 लाख लीटर प्रति दिन दूध उत्पादन का अनुमान है। राज्य के छात्र-छात्रओं और अग्रणी किसानों के लिए राज्य में मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की स्थापना की जाएगी।

विपक्ष ने जताया विरोध, कहा- भाषण झूठ का पुलिंदा
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने बीच में टोका-टाकी की। सबसे पहले झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने राज्यपाल का ध्यान खींचते हुए कहा कि  महामहिम, सरकार के इस भाषण में राज्य के अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति के कल्याण की कोई बात नहीं है। जबकि राज्य में 14 फीसदी अनुसूचित जाति और 11 फीसदी अल्पसंख्यक निवास करते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का यह भाषण झूठ का पुलिंदा है। युवकों को रोजगार देने की भी कोई योजना का इसमें उल्लेख नहीं है। भाकपा माले के विनोद कुमार सिंह भी अपनी जगह पर खड़े होकर जोर-जोर बोलने लगे।

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