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पुरानी चुनाव समिति चुनेगी नया उम्मीदवार

प्रदेश भाजपा की पुरानी चुनाव समिति ही राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार के लिए नामों की अनुशंसा करेगी। जमशेदपुर और खरसावां उपचुनाव के लिए भी पुरानी चुनाव समिति ने ही नामों पर विचार किया था। प्रदेश भाजपा की नई कमेटी 17 महीने से काम कर रही है, लेकिन आज तक चुनाव समिति नहीं बनी।

कई बार उठी चुकी है मांग
प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी 25 सितंबर 2010 को प्रदेश अध्यक्ष बने थे। उसके बाद उन्होंने अपनी नई कमेटी बनाई थी। दूसरी कमेटियां भी बनीं, लेकिन चुनाव समिति की ओर कभी पार्टी का ध्यान नहीं गया।

झारखंड प्रभारी की मौजूदगी में पिछले दिनों विधायक दल की बैठक में यह मामला उठा था। पहले भी कई मौकों पर पार्टी नेता इस सवाल को उठाते रहे हैं, लेकिन पार्टी ने नई चुनाव समिति बनाने की जरूरत नहीं समङी।

विवाद का डर
पार्टी को डर है कि चुनाव समिति के गठन से पार्टी के अंदर विवाद खड़ा हो सकता है। सभी महत्वपूर्ण नेता चुनाव समिति में रहना चाहते हैं। इसकी वजह है कि चुनाव के समय बड़े नेता अपने-अपने लोगों का नाम रखकर उन्हें उपकृत करना चाहते हैं। चुनाव समिति की अनुशंसा पर ही केंद्रीय चुनाव समिति उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाती है।

कम हो गया महत्व
भाजपा के अंदर हाल के वर्षों में चुनाव समिति का महत्व खत्म सा हो गया है। समिति नाम मात्र की है। समिति की बैठकों में उम्मीदवारों के नामों की अनुशंसा की खानापूर्ति की जाती है। उम्मीदवार का नाम या तो पहले से तय होता है या फिर पार्टी के बड़े नेता आपस में मिल बैठकर तय करते हैं।

कई मौकों पर चुनाव समिति की तरफ से चार-पांच नेताओं को उम्मीदवार का नाम तय करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। ऐसे में नई चुनाव समिति बन भी जाए, तो पार्टी को खास फायदा होनेवाला नहीं है।

नई चुनाव समिति के गठन के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने प्रयास शुरू कर दिया है। दूसरे नेताओं से भी बात की है। चुनाव समिति बनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व से सहमति लेनी होती है। प्रभारी की सहमति लेनी होती है। बहुत जल्द चुनाव समिति बन जाएगी। बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री

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