DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रेम की सरलता मैं खो बैठा हूं: रामगोपाल वर्मा

वर्ष 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों पर फिल्म 'द अटैक्स ऑफ 26/11' लेकर आ रहे रामगोपाल वर्मा का कहना है कि वे बॉलीवुड की रोमांटिक या कॉमेडी सरीखी फिल्में नहीं बना सकते क्योंकि उन्हें मानव स्वभाव के बुरे पक्ष को समझने में ज्यादा रूचि है।
  
वर्मा का कहानी कहने का अंदाज कुछ इस तरह का है कि वे उसके अंधेरे और कठोर पक्ष को ही उठाते हैं फिर चाहे वे 'निशब्द' जैसी प्रेमकथा पर ही क्यों न काम कर रहे हों। 'सत्या' के इस निर्देशक का कहना है कि वे पूरी तरह प्रेम पर आधारित पारंपरिक फिल्में नहीं बना सकते।
  
वर्मा ने साक्षात्कार में बताया कि मुझे लगता है कि प्रेम की सरलता मुझमें से कहीं खो गई है। मुझे मानव मस्तिष्क की जटिलताओं और उनके विद्रोही स्वभाव को समझने में मजा आता है। मुझे एक युवा लड़के के प्यार में पड़ जाने की कहानी से ज्यादा आकर्षण कसाब की फांसी पर फिल्म बनाने के प्रति होगा। मैं कभी एक कॉमेडी या प्रेमकहानी पर आधारित फिल्म नहीं बना सकता।

वर्मा अब तक 'सत्या', 'रंगीला', 'कंपनी' और 'सरकार' जैसी प्रभावशाली फिल्में कर चुके हैं। हालांकि 'रक्त चरित्र' और 'डिपार्टमेंट' उनकी पहली फिल्मों जैसा जादू बिखेरने में नाकाम रहीं। वर्मा अपनी आलोचनाओं से प्रभावित नहीं होते और उनका मानना है कि उन्हें जो अच्छा लगेगा वे उसे करना जारी रखेंगे।
  
वर्मा ने कहा कि मैं नकल करने या किसी ऐसे फॉर्मूले को अपनाने में यकीन नहीं रखता जो औरों के लिए काम कर रहा है। इसके साथ ही मेरा यह भी मानना है कि सभी दर्शकों को एक ही वर्ग का नहीं समझा जाना चाहिए। सभी की अलग रूचियां और संवेदनाएं होती हैं। आप उन्हें भेड़ों के एक समूह के रूप में नहीं देख सकते। मैं फिल्में इसलिए बनाता हूं क्योंकि यह मेरा जुनून है और मैं इसके साथ न्याय तभी कर सकता हूं जब मैं अपने काम में यकीन रखूंगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:प्रेम की सरलता मैं खो बैठा हूं: रामगोपाल वर्मा