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हाईकोर्ट के फैसले से चिश्ती का परिवार खुश

राजस्थान की जेल में बंद 80 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक खलील चिश्ती के परिवार ने आज चिश्ती को जमानत पर रिहा करने संबंधी भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर खुशी जताई।
     
चिश्ती की बेटी शोहा ने भावुक होकर मीडिया से कहा कि उन्होंने टीवी पर अपने पिता को जमानत पर रिहा करने की खबर देखी है। उन्होंने कहा कि हम सभी बहुत खुश हैं। मैंने घर पर आकर अपनी मां को बताया जिन्होंने विशेष नमाज अदा कर खुदा को शुक्रिया कहा।
     
उन्होंने कहा कि खुदा की मेहरबानी और भारतीय तथा पाकिस्तानियों के अथक प्रयास से उनकी जमानत पर रिहाई संभव हो सकी। चिश्ती वर्ष 1992 के हत्या के एक मामले में अजमेर जेल में आजीवन सजा काट रहे हैं। शोहा ने कहा कि परिवार ने पिछले साल दिसंबर में चिश्ती से अंतिम बार मुलाकात की थी।
     
शोहा ने कहा कि उन्होंने और उनकी बहन आमना ने पांच अप्रैल को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को पत्र लिखा था जिसमें भारतीय नेतृत्व के साथ उनके पिता का मामला उठाने का अनुरोध किया गया था।
     
पाकिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी ने भी भारतीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि उनका एनजीओ अब चिश्ती को पाकिस्तान वापस लाने के लिए प्रयास करेगा। बर्नी ने कहा कि बुधवार को, मैं भारत जाकर चिश्ती को पाकिस्तान लाने की अनुमति के लिए उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर करूंगा।
     
उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर चिश्ती की रिहाई से भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। हत्या की घटना के समय चिश्ती अपने रिश्तेदारों से मिलने और सूफी संत ख्वाजा मोइनुददीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत करने के लिए भारत के दौरे पर था। पिछले साल जनवरी में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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