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रेलवे सुरक्षा को अभी भी कमजोर पहलू मानते हैं रेलमंत्री

रेलवे सुरक्षा को अभी भी कमजोर पहलू मानते हुए रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय रेल को यूरोप और जापान जैसी विश्व की आधुनिक रेल प्रणालियों जैसी संरक्षा की कसौटी पर खरा उतरना होगा, जहां उच्च रफ्तार वाले मार्गों पर रेल दुर्घटनाओं में दशकों से कोई मौत नहीं हुई है।

लोकसभा में 2012-13 का रेल बजट पेश करते हुए त्रिवेदी ने जान है तो जहान है का फार्मूला पेश किया और कहा कि मैं वर्तमान संरक्षा मानकों से कतई संतुष्ट नहीं हूं। फिर भी मैं इस माननीय सदन को बताना चाहता हूं कि संपूर्ण रेल परिवार इससे चिन्तित है और इसमें सुधार करने के लिए संगठित प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 2001 में की गई यह प्रतिबद्धता कि प्रति दस लाख ट्रेन किलोमीटर (गाड़ी किलोमीटर) पर दुर्घटनाओं की संख्या 0.55 से घटाकर 0.17 की जाएगी और उसे पूरा कर लिया गया है। बहरहाल, हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि रेल दुर्घटनाओं में कोई जान नहीं जाए।

इस संदर्भ में त्रिवेदी ने कहा कि मेरा मानना है कि भारतीय रेल पर संरक्षा का मानदंड विश्व की अन्य आधुनिक रेल प्रणालियों के समान होनी चाहिए, चाहे यूरोप हो या जापान। इन रेल प्रणालियों में संरक्षा का स्तर बहुत सराहनीय रहा है और उच्च रफ्तार वाले मार्गों पर दशकों से रेल दुर्घटना में कोई मौत नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि 40 प्रतिशत से अधिक रेल दुर्घटनाओं में, जिनमें हताहतों की संख्या पूरे वर्ष की संख्या का 60 से 70 प्रतिशत होती है, बिना चौकीदार वाले फाटकों पर होती हैं। रेलमंत्री ने कहा कि अगले पांच साल में लेवल क्रासिंग को तीव्र गति से समाप्त करने के लिए मैंने रेल रोड ग्रेड सेपरेशन कापरेरेशन आफ इंडिया नामक एक विशेष प्रयोजन निगम के गठन करने का निर्णय किया
है।

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