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कभी मेघालय में भी थी रेल लाइन...

मौजूदा समय में मेघालय का जुड़ाव रेल लाइन से भले ही न हो पर करीब 125 साल पहले दुनिया के सबसे रुमानी पर्वतीय रेलवे के तौर पर मशहूर चेर्रा कंपनीगंज स्टेट रेलवे (सीसीएसआर) ने अपने जमाने में काफी शानदार सफर तय किया था।
   
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के समकालीन सीसीएसआर का मकसद अभी के बांग्लादेश के मैदानी भागों के जरिए कोलकाता और शिलांग को यहां से जोड़ना था। डीएचआर तो अभी विश्व धरोहरों की सूची में शामिल है लेकिन सीसीएसआर इतिहास के पन्नों में कहीं गुम हो गया है। मेघालय के सीसीएसआर के तहत आवाजाही की शुरुआत छह जून 1886 को हुई थी।
   
चेरापूंजी की तलहटी में बसे एक छोटे से गांव थरिया और कंपनीगंज के बीच मुसाफिरों और सामानों को लाने ले-जाने का काम होता था। कंपनीगंज अब बांग्लादेश का हिस्सा बन चुका है।
   
इंडियन रेलवेज-दि फाइन फ्रंटियर नाम की किताब लिखने वाले अरूप कुमार दत्ता ने इस बाबत बताया ज्यादातर लोग नहीं जानते कि चेरापूंजी से मावसमाई तक 3.5 मील लंबी रेल लाइन कभी वजूद में हुआ करती थी। मावसमाई अब पूर्वी खासी हिल्स जिले में है।
   
दत्ता ने इस तथ्य का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार में ब्रिटिश रेलेवे के दस्तावेज खंगाले। उन्होंने नई दिल्ली के ही रेल संग्रहालय और असम के राज्य अभिलेखागार की भी मदद ली।

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