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2500 सवारी डिब्बों में लगेंगे बायो टॉयलेट

ट्रेनों को ज्यादा साफ सुथरा बनाने और पटरियों को जंग से बचाने के मकसद से रेलवे अगले वित्त वर्ष में 2500 सवारी डिब्बों में बायो टॉयलेट लगाएगा।
 
रेलवे मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने बुधवार को लोकसभा में वर्ष 2012-13 का रेल बजट पेश करते हुए कहा कि मल के कारण पटरियों में जंग लगने की समस्या अरसे से सिरदर्द बनी हुई है। पटरियों में जंग लगने के कारण रेलवे को हर साल 350 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान होता है।
 
त्रिवेदी ने बताया कि काकोदकर और पित्रोदा समितियों ने भी स्वच्छता और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सवारी डिब्बों में परंपरागत शौचालयों की जगह ग्रीन टायलेट लगाने का सुझाव दिया है।
 
उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित बायो टॉयलेट का फिलहाल विस्तृत परीक्षण चल रहा है। अगले वित्त वर्ष में 2500 सवारी डिब्बों में इस तरह के टॉयलेट लगाए जाएंगे।
 रेल मंत्री ने बताया कि कुछ प्रीमियम ट्रेनों में निर्वात टॉयलेट के ट्रायल की भी योजना है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर और डिब्बों में इस तरह के ग्रीन टॉयलेट लगाए जाएंगे।
 
त्रिवेदी ने बताया कि रेलवे पवन और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रहा है। वह आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 72 मेगावाट क्षमता वाली पवनचक्कियां लगाएगा।
 
उन्होंने बताया कि दूरदराज के 200 स्टेशन ऊर्जा की अपनी जरूरतों को पूरी तरह सूरज की रोशनी से पूरा करेंगे। जिन इलाकों में बिजली उपलब्ध नहीं है उनमें 1000 रेल फाटकों पर सौर ऊर्जा से रोशनी की व्यवस्था की जाएगी।
 
वर्ष 2012-13 में रायपुर और टोंडियारपेट में दो बायो डीजल संयंत्र लगाए जाएंगे। डीजल इंजनों में प्रदूषण के स्तर की जांच के लिए मोबाइल उत्सर्जन परीक्षण कार की व्यवस्था की जाएगी।
 
मोबाइल फोन पर मिले संदेश को रिजर्वेशन का सबूत माना जाएगा जिससे कागज की बचत होगी। उत्तर बंगाल के जंगली इलाकों में कम उत्सर्जन वाले डीजल इंजनों के जरिए ग्रीन ट्रेनें चलाई जाएंगी जिनके डिब्बों में बायो टॉयलेट होंगे।

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