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सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों की पुनर्खरीद को मंजूरी

सरकार ने विनिवेश कार्यक्रम में तेजी लाने के लिये शेयरों की पुनर्खरीद योजना को मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शेयरों की पुनर्खरीद कर सकेंगी। 

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के शेयरों के पुनर्खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार ने 2011-12 में विनिवेश से 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन अभी तक विनिवेश कार्यक्रम उम्मीद के अनुरुप आगे नहीं बढ़ पाया। शेयर पुनर्खरीद प्रस्ताव को मंजूरी से सरकार को धन जुटाने में मदद मिलेगी।
  
इस वित्त वर्ष में अभी तक सरकार पावर फाइनेंस कारपोरेशन (पीएफसी) के शेयरों की बिक्री से मात्र 1,145 करोड़ रुपये ही जुटा पाई है। ओएनजीसी में पांच प्रतिशत शेयरों का नीलामी के जरिये विनिवेश करने 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
  
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इससे पहले शेयरों की पुनर्खरीद और कंपनियों द्वारा इक्विटी विनिवेश के नियमों को उदार बनाया था। नए नियमों के बाद अब कंपनी शेयरों की बिक्री की प्रक्रिया कुछ ही दिनों में पूरी कर लेंगी, जबकि शेयर बिक्री की सामान्य प्रक्रिया में महीनों का समय लगता है।
  
सेबी के नये नियमों के तहत कंपनियां शेयरों की पुनर्खरीद प्रक्रिया 34 से 44 दिन के भीतर पूरी कर लेंगी। सेबी ने एक और प्रणाली को मंजूरी दी है जिसमें कंपनियों के प्रवर्तक संस्थागत नियोजन कार्यक्रम (आईपीपी) के तहत अपनी 10 प्रतिशत पूंजी की नीलामी कर सकती हैं। 

शेयरों की वापस खरीद निर्णय के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मैं मंत्रिमंडल के फैसले के बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता। इसकी कुछ प्रक्रियाएं हैं और इसकी घोषणा समय के साथ की जाएगी।
   
विनिवेश कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए विनिवेश विभाग ने संबंधित मंत्रालयों की राय मांगी है और इसके लिए नकदी वाले सार्वजनिक उपक्रमों की सूची बनाई है। हालांकि, पेट्रोलियम, उर्जा, इस्पात, कोयला और खान मंत्रालयों ने शेयर पुनर्खरीद प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश कार्यक्रम पर असर पड़ेगा।
    
शेयरों की पुनर्खरीद से सरकार को राजकोषीय घाटे को पाटने में मदद मिलेगी। राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीने में ही सालाना लक्ष्य को पार कर चुका है।
    
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के सदस्य गोविंद राव ने कहा कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 4.6 प्रतिशत के लक्ष्य से एक प्रतिशत अंक अधिक रह सकता है।

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