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लोकपाल के दायरे में आ सकते हैं PM

जंतर-मंतर पर एक दिन के सांकेतिक धरने के बाद सरकार लोकपाल पर स्थायी समिति की सिफारिशों से आगे जाते हुए टीम अन्ना की दो मांगों को मानने का मन बना रही है। अन्ना को मिले विपक्ष के साथ के बाद प्रधानमंत्री और ग्रुप सी के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में शामिल करने पर सरकार में मंथन चल रहा है। बहरहाल, कोई भी फैसला यूपीए के घटक दलों और विपक्षी पार्टियों के साथ विचार-विमर्श करके ही लिया जाएगा। सरकार ने बुधवार को लोकपाल पर सर्वदलीय मीटिंग बुलाई है।

सूत्रों का कहना है कि ज्यादा दबाव पड़ा तो सरकार आंतरिक सुरक्षा और विदेशी मामलों को को अलग रख कुछ शर्तों के साथ प्रधानमंत्री को भी लोकपाल में शामिल करने पर राजी हो सकती है। बीजेपी पहले से ही इसकी हिमायत कर रही है। राहुल गांधी के साथ संगठन में सक्रिय कांग्रेस सांसद मीनाक्षी नटराजन भी ग्रुप सी कर्मचारियों और सीबीआई को लोकपाल के दायरे में न लाए जाने पर संसदीय समिति की रिपोर्ट में अपनी असहमति जता चुकी हैं। ऐसे में सरकार को ग्रुप सी के सरकारी कर्मचारियों को इसके दायरे में लाने में शायद एतराज नहीं होगा।

यूपीए के घटक दलों और सर्वदलीय बैठक के बाद सरकार कैबिनेट की बैठक में लोकपाल विधेयक के संशोधित मसौदे को मंजूरी दे सकती है। बताया जा रहा है कि सरकार सीबीआई को सीधे लोकपाल के दायरे में लाने के पक्ष में नहीं है। लेकिन, लोकपाल की निगरानी में रहने पर उसे एतराज नहीं है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री नारायण सामी ने कहा कि लोकपाल पर सर्वदलीय बैठक के बाद सरकार आगे का फैसला करके संसद के इसी सेशन में एक सख्त लोकपाल विधेयक पारित कराने की कोशिश करेगी। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने भी कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद प्रधानमंत्री कार्यालय को लोकपाल के दायरे में लाने को इच्छुक हैं।

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