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मौत की सजा नहीं, जेल जाना पसंद करूंगा: गिलानी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के मामले में संविधान का उल्लंघन करने की बजाय वह अदालती अवमानना के लिए जेल जाना पसंद करेंगे। गिलानी ने पंजाब प्रांत के बहावलपुर में दो सभाओं के दौरान यह बात कही। इससे पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी को आदेश दिया था कि स्विटजरलैंड में जरदारी की ओर से कथित तौर पर जमा किए गए धन से जुड़े मामलों को फिर से खोला जाए, लेकिन प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया। इस मामले में गिलानी को अदालत की अवमानना के मामले में अभ्यारोपित किया गया।

गिलानी ने कहा कि संविधान के उल्लंघन की सजा अनुच्छेद-6 के मुताबिक मौत है। आप बताइए कि क्या मुझे संविधान का उल्लंघन करना चाहिए और इसके लिए मौत की सजा का सामना करूं कौन सही है, क्या जेल जाना चाहिए अथवा मौत की सजा पानी चाहिए।

उन्होंने बहावलपुर इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए पूछा कि उन्हें इन दोनों विकल्पों में से क्या चुनना चाहिए, तो छात्रों ने कहा कि छह महीने की जेल की सजा सही है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं पहले भी पांच साल जेल में रहा हूं और छह महीने भी रह सकता हूं। इससे क्या फर्क पड़ता है।   गिलानी ने कहा कि उन्होंने किसी भी तरीके का असंवैधानिक कदम नहीं उठाने का फैसला किया है।

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