DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वित्तमंत्री ने दिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने के संकेत

पेट्रोलियम पदार्थों पर लगातार बढ़ती सब्सिडी से चिंतित वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के लगातार बढ़ते दाम के मद्देनजर सरकार बजट सत्र के बाद इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों से बातचीत करेगी। सब्सिडी नियंत्रण के लिये राजनीतिक आमसहमति बनाना आवश्यक है।

मुखर्जी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि संसद का बजट सत्र समाप्त होने के बाद मैं विभिन्न राज्य सरकारों, मुख्यमंत्रियों, राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के साथ विचार विमर्श करूंगा और कुल मिलाकर एक ऐसी प्रणाली निकालने की कोशिश करूंगा, जिसके जरिए हम कुछ बहुत महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने में सक्षम होंगे। इन अहम मुद्दों के लिए सभी भागीदारों का सामूहिक सहयोग वांछित है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने जून, 2010 में पेट्रोल के दाम सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिये थे। लेकिन डीजल व घरेलू रसोईं गैस की बिक्री पर वह अभी भी भारी सब्सिडी देती है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने पेट्रोलियम सब्सिडी के लिए 65,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं और 2012.13 में इसके लिये 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकार का इरादा अगले वित्त वर्ष में सब्सिडी पर कुछ हद तक अंकुश रखने का है।

सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों की लागत से कम मूल्य पर बिक्री से साल में दो लाख करोड़ रुपए तक के राजस्व के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। पेट्रोल पर यह नुकसान 5 रुपए लीटर, डीजल पर 14.73 रुपए लीटर, मिट्टी तेल पर 30.10 रुपए लीटर और रसोईगैस सिलेंडर पर 439.50 रुपए की कमाई का नुकसान है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:प्रणब मुखर्जी ने दिए ईंधन कीमतें बढ़ाने के संकेत