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मुद्रास्फीति का प्रबंधन प्रमुख चुनौती: प्रणब

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि उच्च वृद्धि की ओर लौटना, मुद्रास्फीति का प्रबंधन और भारत को वैश्विक आर्थिक हालात के असर से बचाना देश की प्रमुख चुनौतियां हैं।
    
उन्होंने अपने कार्यालय के बाहर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए तीन प्रमुख चुनौतियां हैं। मुद्रास्फीति को सहनीय सीमा पर बकरार रखते हुए और विश्व के अन्य हिस्सों में उभरते हालात (संकट) के असर से देश को हरसंभव बचाने के साथ साथ उच्च वृद्धि के दायरे में कैसे लौटा जाए। मुखर्जी ने यह टिप्पणी उस दिन की है जबकि सरकार ने संसद में छमाही समीक्षा पेश की है जिसमें देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर नौ फीसद से घटाकर 7.5 फीसद कर दी गई।
    
भारत ने 2005-05 से लेकर 2007-08 के दौरान नौ फीसद की वृद्धि दर दर्ज की थी लेकिन इसके बाद के तीन साल में वृद्धि दर 6.7 फीसदी, आठ फीसदी और 8.5 फीसदी पर आ गई। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर घटकर 7.3 फीसदी पर आ गई जो पिछले साल की समान अवधि में 8.6 फीसदी पर थी।
    
हाल के महीनों में मुद्रास्फीति में कुछ कमी आई है लेकिन समीक्षा में मंहगाई दर में कमी की धीमी रफ्तार पर चिंता जाहिर की गई। सरकार को उम्मीद है कि साल के अंत तक मुद्रास्फीति सात फीसदी के करीब आ जाएगी।

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