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जब जरूरी हो तो न कहना सीखें

समीर पारिख
हम खुद को कई बार ऐसी स्थितियों में पाते हैं, जब किसी दूसरे व्यक्ति को हां कहना या उसकी हां में हां मिलाना बड़ा आसान लगता है। पर अपनी इस आदत के कारण हम कई बार बड़ी गलतियां कर जाते हैं। न कहना एक महत्वपूर्ण स्किल है, इससे लोगों की आपके बारे में एक राय बनती है, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होती है। जानें कैसे-

01. हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है: ध्यान रखें कि हर व्यक्ति का सोचने का अपना तरीका होता है। उस सोच का स्वागत किए जाने की जरूरत है।
02. आप अपने बारे में सोच सकते हैं: ध्यान रखें कि किसी मुद्दे पर आपकी अपनी राय हो सकती है। इस सोच-विचार की क्षमता से खुद को वंचित न करते हुए आप अपनी निर्णय लेने की क्षमता का परिचय दें। अपना विचार रखें।
03. अलग होने में कोई बुराई नहीं: दूसरे लोगों से अलग होना हमेशा गलत नहीं होता। इससे अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा मुद्दे से जुड़े विभिन्न पक्षों को समझने में मदद मिलती है। ऐसे में सबसे अलग होने में भी कोई बुराई नहीं है।
04. दूसरों पर आंख मूंद कर विश्वास न करें: किसी कार्य को करने की उपयोगिता का मूल्यांकन अपनी जरूरत के आधार पर करें। निर्णय आपके जीवन की वास्तविकता और उससे जुड़ी चीजों पर आधारित होना चाहिए।
05. चुनें वही, जो आपके लिए सही: यह जरूरी नहीं कि जो किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उपयोगी हो, वह आपके लिए भी उसी तरीके से उपयोगिता रखता हो। हर व्यक्ति अलग होता है। उसकी जरूरतें, उसका व्यक्तित्व, जरूरतों और चुनौतियों और स्थितियों का सामना करने के तरीकों के आधार पर निर्भर करते हैं।
06. क्रोध से दूर रहें: निश्चयी बनें। अपना पक्ष दूसरों के सामने रखते समय क्रोध में न आएं। उत्तेजित न हों। क्या उपयोगी होगा और क्या नहीं, इस संबंध में अपना पक्ष बताएं और उस पर दृढ़ निश्चयी रहें।
07. आत्मविश्वासी बनें: अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें। यदि आप नहीं कह रहे हैं तो आपके पास यह तर्क होना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत। जो आपको सही लगता है, वैसा ही करें।
08. अपनी प्राथमिकताएं तय करें: अपनी प्राथमिकताएं अपनी जरूरतों के आधार पर तय करें, दूसरे क्या सोचते हैं, इस बात पर नहीं। पूरी तरह सोच-समझ कर ही कोई निर्णय करें।
09. दूसरों को नकारें नहीं: किसी दूसरे की बात से सहमत होना या असहमत होना सीखना भी बेहद जरूरी है। पर हमेशा दूसरे के विचार को एक सिरे से नकार देना भी उचित नहीं है। इसलिए ध्यान से सुनें, उसका विश्लेषण करें और अपनी सोच-समझ और जरूरतों को ध्यान में रख कर ही फैसला करें।
10. यदि संदेह है तो प्रश्न करें: यदि यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आपको क्या करना चाहिए तो दूसरे लोगों पर आंख मूंद कर विश्वास करने की जगह दूसरे लोगों से बात करें। इस संबंध में परिवार के सदस्यों व मित्रों से राय ले सकते हैं।

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