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बिहार में होगा चाय उद्योग का विस्तार

बिहार चाय उद्योग में भी सशक्त भागीदारी निभाने की तैयारी में है। इसके विकास के लिए 100 करोड़ रुपए निवेश की कार्ययोजना तैयार की गई है। राज्य सरकार भी चाय प्रोत्साहन नीति बनाने पर विचार कर रही है। इस दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है।

सरकार चाय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दे रही है। यही नहीं, जिन राज्यों में उन्नत चाय उद्योग हैं, वहां के परिवेश, प्रोजेक्ट और नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है।

चाय उद्योग को मजबूत आधार देने के लिए सीमांचल में नए इलाकों की तलाश हो रही है। सीमांचल की आबोहवा चाय के लिए उपयुक्त है। वैसे, इस समय किशनगंज के विभिन्न हिस्से में चाय की अच्छी खेती हो रही है।

यहां के किशनगंज, पोठिया, बहादुरगंज, ठाकुरगंज और दीघलबैंक ब्लॉक के 25 हजार एकड़ जमीन में चाय की खेती हो रही है। अब इसमें विस्तार हो रहा है। कटिहार, पूर्णिया और अररिया जिले में भी इसकी खेती शुरू हो रही है और कई नए इलाकों में चाय की खेती शुरू करने की की तैयारी है।

राज्य सरकार ने चाय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर से पहल भी की है। इसके लिए सब्सिडी में वृद्धि, करों में छूट देने से लेकर नई प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की योजना है। सरकार ने चाय उद्योग पर सब्सिडी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दी है। चाय पर वैट की दर 12.5 फीसदी से घटाकर चार प्रतिशत किया गया। इस समय किशनगंज में एक नीलामी केंद्र भी काम करने लगा है।

क्या है समस्या
इस समय सीमित इलाके में खेती। प्रोसेसिंग यूनिट की कमी। प्रोत्साहन नीति का अभाव। बेहतर गुणवत्ता की चाय की कम खेती। चाय उत्पादन के बाद उसकी प्रोसेसिंग के लिए उद्यमियों को पश्चिम बंगाल जाना पड़ रहा है। इस समय मात्र पांच प्रोसेसिंग यूनिट ही काम कर रही हैं। जबकि, 20 अतिरिक्त यूनिट की संभावना है।

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