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छह पुरानी चीनी मिलों में उद्यमियों की दिलचस्पी नहीं

छह वर्षो में चार बार टेंडर करने के बावजूद हथुआ, सीवान, बनमनखी, गोरौल, गुरारू और वारसलिगंज चीनी मिलों को चालू करने के लिए कोई उद्यमी तैयार नहीं है। अंतिम बार हुए टेंडर में लोहट में चीनी मिल और समस्तीपुर चीनी मिल की जमीन पर जूट उद्योग खोलने को उद्यमी तैयार हुए।

सूबे के गन्ना उद्योग मंत्री अवधेश प्रसाद कुशवाहा ने यह जानकारी विधानसभा में सुबोध राय के अल्पसूचित प्रश्न का जवाब में दी। उन्होंने बताया कि चीनी निगम की बंद पड़ी कुल 15 चीनी मिलों में से सात के खुलने की संभावना पर सीबीआई कैप्स ने विराम लगा दिया है। इन मिलों की जमीन पर दूसरे उद्योग ही लगाए जा सकते हैं।

जदयू के मंजीत कुमार सिंह के तारांकित प्रश्न पर श्री कुशवाहा ने कहा कि ईख क्षेत्र के विकास के लिए योजनाओं का इस्टीमेट तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग के पास पड़ा हुआ है।

सिंह बार-बार यह पूछते रहे कि सरकार को ईख कर के रूप में अब तक कितनी राशि मिली है। लेकिन, मंत्री जवाब देने से कतराते रहे। इस पर सिंह ने आरोप लगाया कि मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं। अब तक ईख बोर्ड का गठन नहीं हो पाया है।

सिंह ने ही जानकारी दी कि गोपालगंज की चीनी मिलों से सरकार को वर्ष 2000 से 2005 की अवधि के बीच 25 करोड़ का कर मिला है। बावजूद सरकार खर्च नहीं कर वित्त विभाग पर पल्ला झाड़ रही है।

रामदेव महतो के तारांकित प्रश्न पर श्री कुशवाहा ने कहा कि दरभंगा जिले के रैयाम चीनी मिल के मजदूरों का बकाया भुगतान किया जा रहा है। कुल 858 कर्मियों में से 343 मजदूरों का भुगतान हो गया है। दरभंगा डीएम के पास 9.24 करोड़ रुपए हैं। बचे कर्मचारियों का भुगतान किया जा रहा है।

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