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'कॉरपोरेट जगत को भी लाया जाए आरटीआई के दायरे में'

कॉरपोरेट घरानों और चंदा लेने वाले संस्थानों को भी सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाने की वकालत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की है। कुमार ने शुक्रवार को आरटीआई पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि वैसे सभी संस्थान जहां लोगों का पैसा लगा होता है, वहां आरटीआई को लागू किया जाना चाहिए।

कुमार ने कहा कि कॉरपोरेट कंपनियां शेयर जारी करती हैं। अनेक बार लोगों की गाढ़ी कमाई इसमें डूब जाती है। लिहाजा कारपोरेट कंपनियों में भी पारदर्शिता होनी चाहिए। आम जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके पैसे का क्या उपयोग हो रहा है?

उन्होंने राज्य सूचना आयोग को आरटीआई कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न से जुड़े मामले अपने यहां दर्ज करने की सलाह दी। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही आरटीआई आवेदकों के लिए सभी प्रखंडों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।

लोकसेवाओं का अधिकार कानून (आरटीएस) को देशभर में लागू करने पर जोर देते हुए श्री कुमार ने कहा कि बिहार में आरटीएस की बदौलत हरेक काम की समयसीमा तय कर दी गयी है। मुख्यमंत्री ने नेत्रहीनों के लिए आरटीआई के ब्रेल संस्करण का लोकार्पण किया। ऐसा करने वाला बिहार पहला राज्य है। आरटीआई का उर्दू संस्करण भी जनता को समर्पित किया गया।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरटीआई के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने की सलाह दी है। उन्होंने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के निजी जीवन से संबंधित सूचना हासिल करने के लिए आरटीआई के इस्तेमाल का विरोध किया। मोदी ने कहा कि आरटीआई से नए-नए घोटालों का पर्दाफाश हुआ है। इसी वजह से आरटीआई पर लगाम डालने की कोशिश हो रही है।

देश के मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानन्द मिश्र ने शिक्षा का अधिकार और खाद्य सुरक्षा कानून को भी मजबूती के साथ लागू करने की आवश्यकता जतायी। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हुसैन ने कहा कि बदलाव का लाभ समाज में अंतिम पायदान पर खड़े आदमी तक पहुंचाना शासन के लिए बड़ी चुनौती है।

आरटीआई इस काम को प्रभावकारी तरीके से लागू कराता है। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एपी शाह ने बिहार में एक आवेदन पर एक ही सूचना देने संबंधी प्रावधान का विरोध किया और कहा कि यह प्रावधान आरटीआई की मूलभावना का उल्लंघन करता है।

बिहार सरकार इस प्रावधान को तत्काल खत्म करे। न्यायाधीशों की संपत्ति को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। लोकायुक्त जस्टिस सीएम प्रसाद ने आरटीआई को लोकतंत्र के लिए ऑक्सीजन बताया और कहा कि न्यायाधीश भी ‘पब्लिक सर्वेट’ हैं।

नौ लोक सूचना पदाधिकारी हुए सम्मानित, शुभचंद्र झा को मिला पहला स्थान
भारत में आरटीआई के छह साल पूरा होने पर बिहार के नौ लोक सूचना पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। बिहार राज्य सूचना आयोग की ओर से आयोजित सम्मेलन में उत्कृष्ट लोक सूचना पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सम्मानित किया।

राज्य के सर्वश्रेष्ठ लोक सूचना पदाधिकारी का पुरस्कार जल संसाधन विभाग के लोक सूचना पदाधिकारी सह जनसंपर्क अधिकारी शुभचंद्र झा को दिया गया। श्री झा ने बताया कि एक वर्ष के दौरान मैंने 500 लोगों को सूचनाएं उपलब्ध कराई है।

सीतामढ़ी के जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार सहजानंद, विधान परिषद के लोक सूचना पदाधिकारी मधुसूदन कुमार सिन्हा और पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लोक सूचना पदाधिकारी मदन प्रसाद को द्वितीय पुरस्कार मिला।

गया के वरीय पुलिस अधीक्षक विनय कुमार को तीसरा स्थान मिला। तीसरे स्थान पर रहने वाले अन्य लोक सूचना पदाधिकारियों में पथ प्रमंडल मुंगेर के प्राक्कलन पदाधिकारी शिवेंद्र नारायण सिंह, बेगूसराय के अनुमंडल पदाधिकारी कुमार अनुज, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुधीर कुमार और कृषि विश्वविद्यालय पूसा के लोक सूचना पदाधिकारी डॉ. काशीनाथ पाठक शामिल हैं।

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