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बिहारियों के बगैर नहीं चल सकती दिल्लीः नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के लोग दिल्ली पर बोझ नहीं हैं बल्कि बिहारियों के बगैर दिल्ली का काम नहीं चल सकता। यदि दिल्ली में रहने वाले बिहार के बीस फीसदी लोग एक दिन काम छोड़ दें तो दिल्ली ठहर जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह बात वे काम रोकने के लिए नहीं कह रहे हैं बल्कि इसलिए कह रहे हैं कि दिल्ली पर हमारा भी उतना ही हक है जितना सबका। बिहार के लोगों ने दिल्ली या देश के अन्य हिस्सों में नहीं बल्कि पूरे विश्व में कड़े परिश्रम से अपना मुकाम खड़ा किया है।

यहां संत निरंकारी समागम मैदान में आयोजित बिहार शताब्दी उत्सव में हजारों प्रवासी बिहारियों को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ समय पहले तक दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बिहारियों का मजाक बनाया जाता था।

स्थिति यह थी कि हमारे लोग अपनी पहचान छुपाते थे। क्योंकि बिहार के ऊपर पिछड़ेपन का ठप्पा लगा हुआ था। लेकिन बदलते वक्त के साथ बिहार प्रगति कर रहा है। बिहार के प्रति लोगों की सोच बदली है।

आज बिहारी होना सम्मान का प्रतीक बन रहा है। कल तक दिल्ली में जो बिहारी अपनी पहचान छुपाने की कोशिश करते थे, वही आज चाहते हैं कि कोई पूछे कहां के हो तो वह झट से बताएं कि बिहार से।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के लोगों, छात्रों ने विषम परिस्थियों के बावजूद देश के दूसरे हिस्सों में जाकर अपना मुकाम बनाया है। डेढ-दो सौ साल पहले वे नौकाओं के जरिये कठिन परिस्थितियों में मॉरीशस गए और वहां की जमीन को उपजाऊ बनाकर वहीं बस गए।

स्थिति यह है कि आज अखबार में खबर छप जाए कि चांद पर बहाली होने वाली है तो वे चांद पर जाने को भी तैयार हो जाएंगे। बिहार के लोग भीख नहीं मांगते। वे परिश्रम और कौशल से अपनी जगह बनाते हैं।

दुनिया के किसी भी कोने में बिहार के लोग बसे हो वे अपनी संस्कृति को नहीं भूलते। आज भी मारीशस के बिहारी मूल के घरों में भोजपुरी बोली जाती है। नीतीश ने प्रवासी बिहारियों से कहा कि वे कहीं भी रहें परिश्रम करें, कमाएं और उसका एक हिस्सा अपने अपने घर के सदस्यों को भी भेजें।

उन्होंने प्रवासी बिहारियों से कहा, ‘आप अपनी जगह डटिए, हम बिहार को चमकाते हैं ताकि आप गर्व से कह सकेंगे कि हम बिहारी हैं।’

बिहारियों के नहीं जाने से पंजाब वाले अब परेशान हैं-महाराष्ट्र और असम में बिहार के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव का जिक्र करने के बाद नीतीश ने कहा कि 2006 में जब पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे तो लुधियाना प्रशासन ने बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के श्रमिकों के लिए वर्क परमिट का प्रावधान कर दिया।

मजदूरों के इस शोषण की खबर अबखारों के जरिये उन्हें मिली तो उन्होंने पंजाब सरकार के समक्ष मुद्दा उठाया। बाद  में एक प्रतिनिधिमंडल भी वहां भेजा। प्रशासन को यह प्रावधान हटाना पड़ा। यह एक घटना थी। लेकिन छह साल के बाद स्थितियां बदली हैं। कुछ समय पहले पंजाब के आर.एल. भाटिया राज्यपाल बनकर बिहार आए।

उनसे शिष्टाचार भेंट करने के लिए गया तो उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग बड़े परेशान हैं। मैंने पूछा क्यों तो उन्होंने कहा कि बिहार के लोग काम करने लिए वहां कम आ रहे हैं। दरअसल, बिहार में लोगों को अब काम मिल रहा है। लेकिन इससे पंजाब के लोगों को दिक्कत हो रही है। नीतीश ने जोर देकर कहा कि बिहार के लोग देश में रोजगार के लिए अपनी मर्जी से जहां चाहेंगे जाएंगे लेकिन अच्छे रोजगार के लिए। सिर्फ दो जून की रोटी के लिए नहीं।

इससे पूर्व नीतीश कुमार ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए 20 विभिन्न क्षेत्रों के 20 लोगों को विशिष्ट बिहारी सम्मान से सम्मानित किया। बिहार विधान परिषद के सदस्य संजय झा ने मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का स्वागत किया।

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