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सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखी बिहार की छटा

बिहार शताब्दी उत्सव 2012 में बिहार की छटा देखने को मिली। इसमें भोजपुरी गीत, प्रेमचंद के नाटक के अलावा बिहार के लोक गीत की मनमोहक प्रस्तुति हुईं जिसमें बिहार के गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत किया गया।

इसमें स्कूली बच्चों के अलावा राष्ट्रीय नाट्य कला के छात्रों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। वहीं भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी ने अपनी कविताओं और गीतों से सबका दिल जीत लिया। उनके साथ-साथ लोग भी गाना गा रहे थे।

सांस्कृति कार्यक्रम करीब शाम सात बजे तक चला। शोर-शराबे के बीच एक क्षण ऐसा भी आया जब सभी की आंखें भर आईं। यह क्षण था नाटक और लोक गीत की प्रस्तुति का। प्रेमचंद के नाटक गोदान के जरिए कलाकारों ने गांव की दशा को सहज तरीके से प्रस्तुत किया जिसे देख पूरा माहौल एक दम से शांत हो गया।

इसके बाद बिहार के लोक गीत ‘सौंधी माटी का बिहार’ को स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसकी खास बात यह थी कि पहली बार इस लोकगीत को नाटक के जरिए प्रस्तुत किया गया जिसमें बिहार के पिछड़ेपन और संघर्ष भरे जीवन को मार्मिक तरीके से पेश किया।

विशिष्ट बिहारी सम्मान पाने वाले
यूके सिन्हा-वरिष्ठ आईएसएस अधिकारी हैं तथा सेबी के चैयरमैन
उदय शंकर-वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं तथा स्टार न्यूज के सीईओ
टीएन ठाकुर-जाने-माने टेक्नोक्रेट, ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत
श्याम सरन-विदेश सेवा अधिकारी। पूर्व विदेश सचिव
सबा करीब-क्रिकेटर और कमेंट्रेटर
रंजीत कुमार-जाने-माने वकील हैं
प्रेमशंकर झा-जाने-माने स्तंभकार
मनोज कुमार तिवारी-भोजपुरी गायक
जयंत कस्तुआर-जाने-माने कथक कलाकार
जगदीश प्रसाद-केंद्र सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक हैं (लेकिन पुरस्कार लेने नहीं आ पाए)
हरेन्द्र सिंह-हॉकी के कोच
सुबोध नारायण मालाकर-मेडिकल प्रोफेसर हैं (पुरस्कार लेने नहीं आ पाए)
कामेश्वर प्रसाद-मेडिसिन के प्रोफेसर
डा. रंजीत रॉय चौधरी-जाने-माने डाक्टर और नीति निर्माता
प्रोफेसर डी. एन. झा-जाने-माने इतिहासकार
डा. अशोक सेठ-जाने-माने ह्रदय रोग विशेषज्ञ
डा. ए. के. सिंह-जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ
दिवाकर अस्थाना-टाइम्स ऑफ इंडिया के सहायक कार्यकारी संपादक
भारती दयाल-जाने-मानी कलाकर्मी
अजय सिंह-प्रिंट और टीवी से जुड़े पत्रकार

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