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बहुचर्चित चन्द्रशेखर हत्याकांड मामले में तीन दोषी करार

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व भाकपा माले के युवा नेता चन्द्रशेखर समेत तीन माले कार्यकर्ताओं की हत्या के बहुचर्चित मामले में 14 वर्षो बाद सीबीआई कोर्ट ने फैसला दिया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने मंगलवार को इस कांड के तीन आरोपित ध्रुव कुमार जायसवाल, शेख मुन्ना और इलियास वारसी को दोषी करार दिया है। 22 मार्च को अदालत दोषी करार दिए इन तीनों आरोपितों की सजा के बिन्दुओं पर सुनवाई करेगी।

बहुचर्चित हत्या का यह मामला 31 मार्च 1997 की शाम को हुआ। तब सीवान जिले के जेपी चौक पर अपराधियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाकपा माले के युवा नेता चन्द्रेशखर प्रसाद समेत सीपीआई एमएल के तीन नेताओं की गोली मार कर हत्या कर दी थी। उस समय वे भाकपा माले के बिहार बंद की तैयारी को लेकर एक प्रचार सभा में भाषण दे रहे थे। तभी अपराधियों ने दहशत फैलाने और हत्या करने के लिए आधुनिक हथियार से जमकर गोलीबारी की।

इस घटना में चन्द्रशेखर के अलावा भाकपा माले के जिला कमेटी के सदस्य श्याम नारायण यादव और कार्यकर्ता भुट्टी मियां की मौत हो गयी। गोलीबारी से उनके अलावे भृगुराशन पटेल ,चन्द्रकालू सिंह और मो. आलम खान जख्मी हो गए थे। राजनीतिक स्तर पर काफी हंगामा होने और मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी।

सीबीआई ने इस मामले में कांड के सूचक रमेश सिंह कुशवाहा के बयान पर 7 अगस्त 1997 को सीवान के तत्कालीन बाहुबली  सांसद मो. शहाबुद्दीन, ध्रुव कुमार जायसवाल, रुस्तम मियां, मुन्ना खान, मिंटू खान और रियाजुउदीन  के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र कर हत्या का मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। सीबीआई की टीम ने इस हत्याकांड मामले में 30 मई 1998 को ध्रुव कुमार जायसवाल, रुस्तम मियां, शेख मुन्ना, इलियास वारसी और मो. रियाजुउदीन के खिलाफ चाजर्शीट दायर किया था।

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