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बीपीएल परिवारों के इलाज में गड़बड़ी पर दर्ज होगी प्राथमिकी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत निर्धारित अस्पतालों में इलाज के दौरान अगर गड़बड़ी पाई गई, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जांच के दौरान दोषी मिलने पर अस्पताल प्रबंधन पर प्राथमिकी भी दर्ज की जाएगी। इसके लिए श्रम संसाधन विभाग ने एक टीम गठित की गई है।

उधर, बेतिया के एक अस्पताल पर इलाज में शिथिलता बरतने के कारण उसकी योजना के साफ्टवेयर को सील कर दिया गया है। साथ ही विभाग की ओर से नोटिस भी भेजी गई है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) में बीपीएल श्रेणी के परिवार (एक परिवार से अधिकतम पांच सदस्य) को सालाना 30 हजार रुपये तक का नि:शुल्क इलाज करने का प्रावधान है।

इसके अलावा घर से अस्पताल तक जाने-जाने के लिए सौ रुपए परिवहन व्यय भी सरकार को देना है। मरीजों का इलाज उसी अस्पताल में होगा, जिससे करार किया गया है। बिहार में ऐसे अस्पतालों की संख्या करीब 800 से अधिक है।

बताया जाता कि सरकार को पिछले कुछ दिनों से कुछ अस्पतालों के बारे में यह शिकायत मिल रही है कि वहां आरएसबीवाई से संबंधित बीपीएल परिवारों का ठीक से इलाज नहीं हो पा रहा है।

ऐसी स्थिति में विभाग ने यह निर्णय लिया है कि इलाज के मामले में जिस अस्पताल की शिकायत मिलती है, उस पर अविलंब कार्रवाई होगी। साथ ही, उसे आरएसबीवाई के तहत इलाज के लिए जो साफ्टवेयर दिया गया है, उसे अविलंब लॉक कर दिया जाएगा।

उसके बाद जांच और कार्रवाई शुरू होगी। जांच के बाद यदि अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया गया तो उस पर न सिर्फ विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि प्राथमिकी भी दर्ज होगी। 

आरएसबीवाई के अंतर्गत बीपीएल परिवार के इलाज के बारे में किसी करार अस्पताल से शिकायत मिलती है जो अविलंब उसपर कार्रवाई होगी। इसके लिए टीम गठित कर दी गई है। जरूरत पड़ी तो प्राथमिकी भी दर्ज होगी।
व्यास जी, प्रधान सचिव, श्रम संसाधन विभाग

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