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हंगामें की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल, कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

भाजपा समेत कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों की गृह मंत्री पी चिदम्बरम की बर्खास्तगी की मांग तथा कर्नाटक के सीमावर्ती क्षेत्रों में मराठी भाषी लोगों को कथित तौर पर प्रताडित किए जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार को बर्खास्त करने की शिवसेना सदस्यों की मांग पर लोकसभा में शुक्रवार को भारी हंगामा हुआ। इसके कारण कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
   
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शिवसेना सदस्य कर्नाटक के सीमावर्ती क्षेत्रों में मराठीभाषी लोगों को कथित तौर पर प्रताडित किए जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार को बर्खास्त करने की मांग करने लगे। शिवसेना सदस्य अपने हाथों में पर्चे लिये हुए थे जिस पर कर्नाटक सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई थी।
   
वहीं, भाजपा और अन्नाद्रमुक सदस्य दिल्ली के होटल व्यवसायी के खिलाफ कथित ठगी और जालसाजी से संबंधित तीन एफआईआर वापस लिये जाने के मामले में गृह मंत्री पी चिदंबरम को बर्खास्त किये जाने की मांग करने लगे। समाजवादी पार्टी के सदस्य भी किसी विषय को उठा रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदस्यों को शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने का अनुरोध किया लेकिन सदस्य शांत नहीं हुए। शिवसेना, अन्नाद्रमुक और सपा सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप आ गए और नारेबाजी करने लगे।
   
शोर शराबा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे सदन की बैठक दोबारा शुरू होने पर भी यही नजारा रहा।
   
अन्नाद्रमुक सदस्य चिदम्बरम के इस्तीफे की मांग को लेकर आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। भाजपा सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर यही मांग करते देखे गए और कुछ देर बाद वह भी आसन के समक्ष आ गए। उधर शिवसेना सदस्य अग्रिम पंक्तियों में आकर कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों में मराठी भाषियों पर कथित अत्याचार के मुद्दे पर प्रदेश सरकार की बर्खास्तगी की मांग करते करने लगे।
   
सपा सदस्य बुंदेलखंड को विशेष पैकेज दिए जाने की मांग करते हुए आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। बसपा के दारासिंह चौहान भी अपने स्थान पर खड़े होकर कुछ कहते देखे गए लेकिन हंगामे के कारण उनकी बात नहीं सुनी जा सकी। उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने इसी हंगामे के बीच आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और रेलवे की अनुदान की अनुपूरक मांगों को पारित करवाया।
   
हंगामे के कारण रेलवे संबंधी विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा का रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने अपने उत्तर को सदन के पटल पर रख दिया जिसे पढ़ा माना गया। इसके बाद विनियोग विधेयक को शोरशराबे के बीच ध्वनिमत से पारित करवा दिया गया। हंगामा शांत नहीं होते देख उपाध्यक्ष ने कुछ ही देर बाद बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी।

कुछ यही हाल राज्यसभा का भी रहा। बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे की वजह से सदन में प्रश्नकाल नहीं चल पाया।
   
सदन की बैठक शुरू होने पर दिवंगत पूर्व सदस्य राज बहादुर गौड़ को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद सभापति हामिद अंसारी ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने का ऐलान किया, शिवसेना सदस्यों ने कर्नाटक के सीमाई इलाकों में रह रहे मराठी भाषियों को कथित तौर पर प्रताडित किए जाने का मुद्दा उठाया। सदन में शिवसेना के नेता मनोहर जोशी ने कहा कि कर्नाटक सरकार मराठी भाषियों की सुरक्षा करने में नाकाम रही है और उसे बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए।
   
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन की बैठक फिर शुरू होने पर वही नजारा दिखा और विभिन्न दलों के सदस्य हंगामा करते रहे। उपसभापति के रहमान खान ने हंगामे के बीच ही जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने शून्यकाल शुरू करने को कहा। लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण शून्यकाल के मुद्दे नहीं उठाए जा सके।
   
हंगामा थमते नहीं देख खान ने सदन की बैठक सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। गौरतलब है कि शीतकालीन सत्र के दौरान उच्च सदन में एक भी बार गैर सरकारी कामकाज नहीं हो पाया है। आमतौर पर शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद सदन में गैर सरकारी कामकाज होता है।

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  • Web Title:हंगामें की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल, कार्यवाही सोमवार तक स्थगित