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मुंबई में आदर्श सोसायटी के बाद एक और घोटाला!

मुंबई में आदर्श सोसायटी घोटाले के बाद एक नया घोटाला सामने आया है। बांद्रा की पॉश साईं प्रसाद हाउसिंग सोसायटी पर आरोप है कि सोसायटी पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित जमीन पर बनाई गई है।

आदर्श सोसाइटी की तरह यहां भी नेता-अधिकारियों ने पहले मिलीभगत से जमीन के इस्तेमाल को बदला और बदले में सोसाइटी में अपने रिश्तेदारों के नाम पर फ्लैट जुगाड़ लिए। दरअसल, यह जमीन पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थी। यहां पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए हॉस्टल बनाना तय हुआ था, लेकिन नेता-अफसरों की साठगांठ से यहां साईं प्रसाद हाउसिंग सोसाइटी खड़ी हो गई।

इस साईं प्रसाद हाउसिंग सोसाइटी में अब कई सीनियर आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का बसेरा है। मुंबई कांग्रेस के नेता कृपाशंकर सिंह भी इसी इमारत में रहते हैं। पिछले दिनों उन पर कार्रवाई के दौरान यह इमारत चर्चा में आई।

फिर धीरे-धीरे यह राज खुला कि घर की चाहत में अफसरों ने पहले तो इस जमीन का इस्तेमाल बदला, फिर करोड़ों की इस जमीन को कौड़ियों के मोल साईं प्रसाद सोसाइटी को सौंप दिया गया। साल 2000 में जब विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, उन्हीं के मंत्रीमंडल में कृपाशंकर सिंह गृह राज्यमंत्री हुआ करते थे।

इसी समय सरकार ने यह प्लॉट सोसाइटी के नाम कर दिया। प्लाट डेढ़ हजार वर्गफुट का था और इसके लिए महज सवा करोड़ रुपए लिए गए। इस प्‍लॉट के लिए जिस-जिस ने एनओसी दी, ग्रीन सिग्लन दिया, उस हर अधिकारी को हिस्सा मिला। हिस्सा फ्लैट के रूप में दिया गया।

आरोप है कि यह सब कुछ बड़ी सफाई से किया गया। आरक्षण हटे बिना जमीन को हासिल करना मुमकिन नहीं था। लिहाजा इस जमीन को बांद्रा-कुर्ला को जोड़नेवाली प्रस्तावित रेलवे लाइन सेवन कॉरिडर को देने का चौंकानेवाला फैसला लिया गया। इस फैसले के लिए तत्कालीन कलेक्टर सी एस संगीतराव ने यह चिट्ठी लिखी थी।

आरोप है बदले में संगीतराव के भाई और उनकी बेटी को साईं प्रसाद सोसाइटी में फ्लैट मिले। तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर मिलंद शंभरकर, मंत्रालय में तैनात आईएएस अधिकारी जयराज फाटक, मौजूदा राजस्व सचिव और तब बीईएसटी के महाप्रबंधक स्वाधीन क्षत्रिय भी इस सोसाइटी में फ्लैट मालिक हैं।

वहीं, साईं प्रसाद हाउसिंग सोसाइटी ने अपना पक्ष रखते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। साईं प्रसाद हाउसिंग सोसाइटी कथित आरटीआई एक्टिविस्ट के आरोपों को गलत बताती है। सोसाइटी का कहना है कि यह कथित आरटीआई एक्टिविस्ट मामले से जुड़े एक तरफा तथ्य दिखा रहा है।

आदर्श घोटाले में दोषी पाए जाने के बाद जिन आईएएस अधिकारी जयराज फाटक को निलंबित कर दिया गया था, वही जयराज फाटक इस जमीन का आरक्षण हटाने के वक्त शिक्षा सचिव हुआ करते थे। उन्हें भी इस सोसायटी में फ्लैट मिला था।

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