DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पिता के रूप में मुलायम की पूरी हुई मुराद

हर पिता चाहता है कि उसका पुत्र उससे आगे निकले, इस कहावत को यदि सच माना जाए तो कहा जा सकता है कि पिता के रूप में मुलायम सिंह यादव की मुराद शनिवार को पूरी हो गई।
 
यादव पहली बार 1989 में मुख्यमंत्री बने थे। उस समय उनकी उम्र करीब 50 वर्ष थी लेकिन उनके पुत्र अखिलेश यादव ने मात्र 38 वर्ष की उम्र में ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को संभाल लिया। अखिलेश के मन में एक कसक जरूर होगी कि पिता के साथ यदि इस ऐतिहासिक समय को देखने के लिए उनकी मां भी जीवित होती तो कितना अच्छा होता।
 
मुलायम सिंह यादव के तीसरी बार 2003 में मुख्यमंत्री बनने के पहले अखिलेश की मां का निधन हो गया था। अखिलेश राजनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। सपा के पूर्ण बहुमत में आने के बाद ही तय हो गया था कि अखिलेश ही मुख्यमंत्री होंगें।


गत सात मार्च को मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश को राजभवन अकेले ले जाकर इस पर मुहर लगा दी थी हालांकि रहस्य तब भी बरकरार रखा था। श्री अखिलेश के विधायक दल के नेता चुन लिए जाने के बाद मुलायम सिंह यादव कहीं नजर नहीं आ रहे थे। सरकार बनाने का दावा पेश करने भी अखिलेश अकेले ही गए। पत्रकारों से भी मुलायम सिंह यादव ने मुलाकात नहीं की।

प्रेस कांफ्रेंस अखिलेश ने ही की लेकिन उनके साथ आजम खां जरूर मौजूद थे। अखिलेश के नेता चुने जाने के बाद लखनऊ में पार्टी मुख्यालय तथा उनके गृह जिले इटावा उनके संसदीय क्षेत्र कन्नौज मैनपुरी और उनके गांव सैफई में माहौल ऐतिहासिक हर्षोल्लास का रहा।
 
लखनऊ के सपा कार्यकर्ताओं के उल्लास का यह आलम रहा कि भीड में किसी ने पटाखे छुडा दिए। भगदड होते होते बची। टीवी कैमरों के सामने पडते ही कार्यकर्ता अखिलेश भैया जिन्दाबाद के नारे लगाने पडते थे। कार्यकर्ताओं के जोश ने कभी कभी अनुशासनहीनता की दीवार भी लांघी।
इससे पत्रकारों को ज्यादा कठिनाई हुई। कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाइयां बांटी और बधाई दी। पार्टी युवा विधायकों और चेहरों में खासतौर पर खुशियां नजर आ रही थी।
 
जीत की खुशी में राजधानी लखनऊ की सडकों के किनारे किनारे लगी होर्डिग्स को हटा दिया गया। होर्डिग्स से लखनऊ नगर के प्रमुख स्थलों को पाट दिया गया था। अखिलेश यादव ने इसे हटाने का निर्देश देकर (चापलूसों) को एक सन्देश भी दिया। चुनाव परिणामों के आते ही छह मार्च को सपा कार्यालय राजभवन विधानभवन और उसके आसपास हजारों होर्डिग्स लगाई गई थी। अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में लोग खुशी से पागल हो रहे थे। करीब 12 वषरे से संसद में रहनुमाई कर रहा उनका प्रतिनिधि देखते ही देखते मुख्यमंत्री जो बन गया। वहां एकदूसरे को मिठाई खिलाते कार्यकर्ता नजर आ रहे थे और गले मिलकर बधाई दे रहे थे।
 
नेकर पहनकर सैफई की जिन गलियों में (टीपू) खेला था आज वह भी गुलजार है। अखिलेश के बचपन का नाम टीपू है। गांव में उनके साथ खेले बच्चों में खुशी का माहौल है। उनके साथ बचपन में खेला राजू कहता है। वह जानता था कि उसका टीपू एक दिन अपने पिता की तरह नाम रोशन करेगा। वह इतना खुश था कि उसकी आंखों में मारे खुशी के आंसू छलक आए। सैफई के जिला मुख्यालय इटावा के आसपास के जिलों मैनपुरी फिरोजाबाद जैसे क्षेत्रों में खास उल्लास देखा गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पिता के रूप में मुलायम की पूरी हुई मुराद