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नौकरशाही से सम्मान पाने के लिए जूझ रहे हैं सांसद

आजादी के छह दशक बीतने के बावजूद नौकरशाही और सांसदों के बीच रस्साकशी जारी है और आज भी जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को नौकरशाहों से उचित मान सम्मान नहीं मिल रहा है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना में सांसदों संबंधी प्रोटोकाल का पालन नहीं किए जाने के मुद्दे को लेकर गुरुवार को भी विपक्षी सदस्यों ने लोकसभा में भारी हंगामा किया जिसके कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी।

कार्मिक एवं पेंशन मंत्रालय ने पिछले दिनों सभी राज्यों के सभी मंत्रालयों और विभागों को विशेष दिशानिर्देश जारी कर सांसदों और विधायकों के प्रति सम्मान से पेश आने को कहा है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है कि केन्द्र सरकार को इस प्रकार के निर्देश जारी करने पड़े हों।

माकपा सांसद एम बी राजेश ने कहा कि नौकरशाह सांसदों को उचित मान सम्मान नहीं देते तथा केन्द्रीय परियोजनाओं के कार्यान्वयन में उनकी भागीदारी को नजरअंदाज किया जाता है। वास्तविकता यह है कि सांसद और विधायक आजादी के बाद 1957 से ही नौकरशाही से सम्मान पाने की कोशिश में जुटे हैं और उसके बाद भी केन्द्र को कई बार इस प्रकार के निर्देश जारी करने पर मजबूर होना पड़ा है।

इस संबंध में सरकार द्वारा जारी किए गए एक पिछले दस्तावेज में तो यह तक कहा गया था कि नौकरशाही औपनिवेशक काल की खुमारी से निकल नहीं पायी है और उसे यह रवैया छोड़कर जन प्रतिनिधियों को उचित सम्मान देना चाहिए।

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