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हर वर्ग की मार्केट है मुनिरका

मुनिरका गांव, एशिया का सबसे अमीर गांव है। और यहां की मार्केट पूरे दिल्ली में लकड़ी की खरीदारी के लिए जानी जाती है। यह सिर्फ नाम का ही गांव है, यहां घरेलू जीवन से जुड़ा ऐसा कुछ भी सामान नहीं कि जो ना मिल जाये। 

लकड़ी के फर्नीचर हैं खास
मुनिरका की ‘फर्नीचर मार्केट’ लकड़ी के बने सामानों की क्वालिटी के कारण प्रसिद्ध है। सोफे, बेड, डाइनिंग टेबल आदि बहुत ही उचित दामों पर मिल जाते हैं। 35 साल से फर्नीचर का काम देख रहे वीरपाल सिंह कहते हैं ‘यहां साकेत, कटवारिया सराय, बेर सराय, मालवीय नगर, आर के पुरम, मोतीबाग और आसपास के लोग तो आते ही हैं, साथ ही यहां पूरे एनसीआर से लोग लकड़ी के सामान की खरीददारी के लिए आते हैं।’ यहां साल भर लकड़ी का काम होता रहता है। वसंत कुंज से बेड खरीदने आये रंजीत कुमार बताते हैं ‘यहां बहुत सी वैराइटी देखने को मिल जाती है। इसके साथ ही रेट भी अन्य जगह से ठीक ठाक रहते हैं।’

बैग और फुटवियर
ट्रैवलिंग बैग और फुटवियर के लिए भी यह बड़ी ही बेहतरीन मार्केट है। यहां फुटवियर की ब्रांडेड से लेकर नॉन ब्रांडेड तक में लम्बी रेंज आपको मिल जायेगी। जेएनयू से ट्रॉली बैग खरीदने आये वैभव कहते हैं, ‘मैं जब से दिल्ली में आया हूं, मैंने अधिकतर खरीदारी यहीं से की है क्योंकि यहां पर दोस्तों के साथ घूमने आने पर खरीदारी भी हो जाती है वह भी अपने बजट में।’ ट्रॉली बैग और लगेज बैग की दुकान चलाने वाले महेंद्र बताते हैं कि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से बैग का आकार तय करते हैं फिर हम उन्हें उनकी रेंज का बैग उपलब्ध कराते हैं। जो 500 से लेकर 2000 तक के भी हो सकते हैं। यहां खरीदारी करने वाले लोग नॉन ब्रांडेड बैग अधिक खरीदते हैं।

खाना-खिलाना
खाने के मामले में भी मुनिरका दिल्ली के अन्य जगहों से सस्ता है। यहां शायद दिल्ली भर में सबसे सस्ता पराठा मिलता है। एक आलू भरे पराठे की कीमत मात्र छह रुपये होती है। जहां एक तरफ पूर्वोत्तर के लोगों का मोमोज मिलता है तो वहीं सांभर-बड़ा भी मिलता है। पूर्वोत्तर के लोगों की बहुलता के चलते यहां चाउमिन और एगरोल आपको जगह-जगह मिल जाएंगे। 

मोमोज हैं खास 
मुनिरका में रहने वाले नार्थ ईस्ट के लोग ही यहां पर विशेष रूप से मोमोज की शॉप चलाते हैं। मुनिरिका में पराठा प्वाइंट के पास ‘मोमोज प्वाइंट’ यहां की सबसे फेमस शॉप है, लेकिन इसी गली  के दाएं-बाएं दोनों तरफ ही मोमोज की ढेर सारी दुकानें सजी हुई मिल जाएंगी। यहां मोमोज आम आकार और डिजाइन से अलग रंग-रूप में नजर आएंगे।

कैसे जाएं
मुनिरका मार्केट का सबसे प्लस प्वाइंट यहां की कनेक्टिविटी है। यह रिंग रोड के नजदीक है इसलिए यहां के लिए करीब-करीब पूरी दिल्ली से बसें मिल जाती हैं। साथ ही हौज खास तक येलो लाईन मेट्रो से आया जा सकता है।

समय: सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक मार्केट खुली रहती है।
खास बातें: बस रूट - 764, 511, 448, 620, 680, 507, 623, 578 और बाहरी मुद्रिका रिंग रोड से 15 मिनट की दूरी पर नजदीकी मेट्रो स्टेशन - हौज खास (येलो लाइन मेट्रो )

संस्कृति का अनोखा संगम 
मुनिरका हमेशा से बाहर से आये लोगों के लिए एक अच्छे ठिकाने के लिए जाना जाता रहा है। यहां कम आय से लेकर ज्यादा आय वाले सभी लोग रहते हैं। यहां विदेशियों की भी अच्छी तादाद देखने को मिल जाएगी। पहले यहां पर बंगालियों और दक्षिण भारतीयों की बहुलता थी लेकिन अब नॉर्थ ईस्ट और पूर्वाचल के लोगों की संख्या बढ़ गयी है। वर्तमान में मुनिरका विविधतावादी संस्कृति के चलते बहुमुखी मार्केट में तब्दील हो गया है। यहां का कल्चर आपको बिल्कुल अलग नजर आएगा जहां एक तरफ मॉडर्न कपड़े पहने हुए लड़कियां दिखेंगी तो वहीं घूंघट किए औरतें भी खूब दिखायी देंगी।

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  • Web Title:हर वर्ग की मार्केट है मुनिरका