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जब ममता मुख्यमंत्री से मुख्य प्रबंधकर्ता बन गईं

कोई मुख्यमंत्री किसी अस्पताल के शवगृह के बाहर पेड़ के नीचे प्लास्टिक की कुर्सी पर घंटों बैठकर किसी हादसे के शिकार हुए लोगों के परिजनों की मदद करे, तो यह दृश्य आम भारतीय राजनीतिज्ञों जैसा नहीं लगता, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एएमआरआई अस्पताल अग्निकांड के बाद ठीक इसी तरह की भूमिका निभाई।

इस मौके पर ममता बनर्जी के भीतर का मुख्यमंत्री, मुख्य प्रबंधकर्ता के रूप में बदल गया, क्योंकि उन्होंने न केवल बचाव कार्य की निगरानी की, बल्कि भीड़ को भी सम्भाला और एसएसकेएम अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शवों को तत्परता के साथ बाहर निकलवाया।

अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि बनर्जी ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और वह अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ सात घंटे तक देर रात तक अस्पताल में बैठी रहीं, वह भी बगैर भोजन-पानी के। एसएसकेएम अस्पताल आने से पहले बनर्जी शुक्रवार सुबह एडवांस्ड मेडिकेयर रिसर्च इंस्टीटय़ूट (एएमआरआई) गईं।

बनर्जी के वहां पहुंचते ही रोगियों के परिजन और तमाशबीन उनकी तरफ दौड़ पड़े, जिसके चलते वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। इस पर बनर्जी अधिकारियों के ऊपर गरज उठीं, यह लाठीचार्ज का समय नहीं है। क्या यह लड़ाई की जगह है?’ इसके साथ ही उन्होंने उपस्थित भीड़ से भी शांत रहने और बचाव कार्य में बाधा न डालने का आग्रह किया। हाथ में माइक लेकर बनर्जी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भी आश्वासन दिया।

बनर्जी ने घोषणा की कि यह एक आपराधिक मामला है। इतने सारे व्यक्ति मारे गए हैं। अस्पताल प्रशासन न केवल लापरवाही का दोषी है, बल्कि लोगों की हत्या करने का भी। अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया जाएगा और दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

कुछ लोगों को हालांकि ममता बनर्जी की वहां उपस्थिति ठीक नहीं लगी, क्योंकि इससे बचाव कार्य में बाधा उत्पन्न हो रहा था। एक पीड़ित के रिश्तेदार ने चिल्लाते हुए कहा कि ममता के यहां होने के कारण एम्बुलेंस गाड़ियां एनेक्स इमारत तक नहीं जा सकतीं। कृपया उनसे कहे कि किसी और रास्ते पर जाएं।

बनर्जी ने कुछ अन्य अस्पतालों में भी जाकर घायलों का हालचाल लिया। बनर्जी एसएसकेएम अस्पताल के अधिकारियों से लगातार आग्रह करती रहीं कि पोस्टमार्टम की औपचारिकताएं जल्दी पूरी की जाएं।

ज्ञात हो कि देश के किसी अस्पताल में घटी अबतक की सबसे भयानक दुर्घटना में 90 रोगियों और कर्मचारियों की झुलसकर मौत हो गई।

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