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पहली बार नीली-गुलाबी टर्फ पर हो रही है हॉकी

ओलंपिक के इतिहास में पहली बार फील्ड हॉकी स्पर्धा गुलाबी किनारी वाली नीली टर्फ पर हो रही है। भड़कीले रंगों का इस्तेमाल दर्शकों का ध्यान खींचकर खेल की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए किया गया है। दक्षिण अफ्रीका के मिडफील्डर वेड पेटन ने कहा कि यहां खेलने का अहसास कुछ अलग है। सूरज की चमचमाती किरणें पर टर्फ पर पड़ती है तो अदभुत लगता है।
    
लंबे समय से यह बहस चल रही थी कि हरे मैदान पर खेले जाने वाले बाकी लोकप्रिय खेलों से हॉकी को अलग कैसे किया जाएगा। अधिकारियों ने सफेद की जगह पीली गेंद और हरी की बजाय नीली गुलाबी टर्फ का प्रयोग किया।
      
ऑस्ट्रेलियाई डिफेंडर मार्क नोल्स ने कहा कि ओलंपिक में हॉकी देखने में बहुत सुंदर लग रही है। अब हॉकी का मैदान अलग से पहचाना जा रहा है जो अच्छी बात है। टीवी पर देखने वालों को भी यह टर्फ बहुत पसंद आ रही है और गेंद को देखना मुश्किल नहीं लग रहा है।

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