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लोकपाल रोकने के लिये एफडीआई विवादः हजारे

राहुल गांधी को आड़े हाथ लेते हुए अन्ना हज़ारे ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस महासचिव के ही कहने पर लोकपाल के दायरे में निचली नौकरशाही और सीबीआई को लाने जैसे मुद्दों पर अचानक रुख पलट लिया होगा।

हज़ारे ने दावा किया कि सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में लोकपाल विधेयक को पारित कराने से बचने के लिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मसले के निराकरण में देरी कर रही है।

गांधीवादी कार्यकर्ता ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए आरोप लगाया कि वह संसद तथा बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिये गये उस आश्वासन का निरादर कर रही है जिसमें कहा गया था कि लोकपाल के दायरे में निचली नौकरशाही, सिटीजन चार्टर शामिल किया जायेगा तथा एक ही विधेयक के जरिये राज्यों में भी लोकायुक्त के गठन के प्रावधान किये जायेंगे।

उन्होंने कहा, मेरे विचार से इस सरकार में कोई तालमेल नहीं है। स्थायी समिति ने (लोकपाल के दायरे में ग्रुप सी के कर्मचारियों को शामिल करने का) एक फैसला किया। मेरे विचार से इस फैसले के बाद राहुल गांधी ने कुछ और कहा होगा और बताया होगा कि नहीं, नहीं, नहीं फैसला नहीं होना चाहिये।

हज़ारे ने कहा, वे उनके निर्देशों पर काम करते हैं। मेरे विचार से राहुल गांधी ने ही उन्हें लोकपाल के दायरे में ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मियों को शामिल नहीं करने का निर्देश दिया होगा। अगर आप इन्हें शामिल नहीं करेंगे तो जनता आपको सबक सिखायेगी।

उन्होंने कहा, हो सकता है कि राहुल गांधी ने (समिति में शामिल कांग्रेस सदस्यों को) फोन पर कहा हो कि इन दो-तीन मुद्दों को शामिल नहीं किया जाये। यह मेरा अनुमान है। आप जानते हैं कि जब आग होती है तभी धुआं उठता है। यह जरूरी नहीं कि किसी ने आग देखी हो।

हज़ारे की यह टिप्पणी लोकपाल पर संसद की स्थायी समिति के इस फैसले के एक दिन बाद आयी कि इस प्रस्तावित निकाय के दायरे में ग्रुप सी के कर्मचारियों को शामिल नहीं किया जायेगा और सीबीआई निदेशक की चयन प्रक्रिया यथावत रहेगी।

इस सवाल पर कि सरकार संसद में कामकाज निर्बाध रूप से चलाने के लिये क्यों एफडीआई मुद्दे का निराकरण नहीं कर रही है, हज़ारे ने कहा कि उन्हें लगता है कि सरकार लोकपाल विधेयक पारित नहीं कराना चाहती।

हज़ारे ने कहा कि यह पूरे देश के साथ विश्वासघात करने जैसा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री कहते हैं कि भ्रष्टाचार से निपटा जायेगा लेकिन दूसरी ओर आप कहते हैं कि लोकपाल के दायरे में ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मियों को नहीं लाया जायेगा।

हज़ारे ने कहा कि इन प्रावधानों को शामिल करने के लिये आपको अतिरिक्त राशि खर्च करने या अतिरिक्त कर्मी लगाने की जरूरत नहीं है। हज़ारे ने कहा, हम शुरुआत से ही यह कहते आये हैं कि लोकपाल को स्वायत्त संस्थान होना चाहिये। आज सीबीआई पर सरकार का नियंत्रण है। हम यह कह रहे हैं कि स्वायत्तता होनी चाहिये। सरकार का सीबीआई पर नियंत्रण नहीं होना चाहिये।

लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने की राहुल गांधी की मांग पर हज़ारे ने कहा कि वह इस विचार के खिलाफ नहीं हैं लेकिन उन्होंने आगाह किया कि इसके चलते सरकार की ओर से दखलंदाजी नहीं होनी चाहिये।

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