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हिंदी न्यूज़इस तरह गुरु गोबिंद सिंह ने की खालसा पंथ की स्थापना

इस तरह गुरु गोबिंद सिंह ने की खालसा पंथ की स्थापना

अप्रैल महीने के 13 या 14 तारीख को बैसाखी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सूर्य अपनी उच्च गति में होता है। पंजाब में खेतों में पक चुकी फसल की कटाई बैसाखी से ही आरंभ करने की सदियों पुरानी परंपरा है।...

इस तरह गुरु गोबिंद सिंह ने की खालसा पंथ की स्थापना
लाइव हिन्दुस्तान टीमWed, 12 Apr 2017 01:46 PM

अप्रैल महीने के 13 या 14 तारीख को बैसाखी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सूर्य अपनी उच्च गति में होता है। पंजाब में खेतों में पक चुकी फसल की कटाई बैसाखी से ही आरंभ करने की सदियों पुरानी परंपरा है। यह त्योहार रंग-बिरंगे वस्त्र पहन कर खुशियों के गीत गाते, लोक नृत्य भांगड़ा करते मनाया जाता है। 

माना जाता है कि इस दिन वर्ष 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने पत्र भेज कर देश के कोने-कोने से सिखों को आनंदपुर साहिब बुलाया। लगभग अस्सी हजार सिख उपस्थित हुए। सुंदर तंबू और कनात लगे दरबार में प्रात: गुरुवाणी के बाद शबद कीर्तन हुआ। इसके बाद वे आगे बढ़े, म्यान में से अपनी तलवार निकाली और नंगी तलवार लेकर मंच के बीचो-बीच जाकर बोले, “मेरी संगत मेरे लिए सबसे प्यारी है। मेरी संगत मेरी ताकत है, मेरा सब कुछ है। लेकिन क्या आप सब में से ऐसा कोई है, जो अभी, इसी वक्त मेरे लिए अपना सिर कलम करवाने की क्षमता रखता हो? तो लाहौर के एक सिख भाई दयाराम उठे। उन्हें गुरु साहब निकट के छोटे तंबू में ले गए। वहां से रक्तरंजित तलवार लेकर आए गुरु साहब ने फिर एक शीश की मांग की। इस बार दिल्ली के भाई धरम दास अपना शीश भेंट करने के लिए उठे।

गुरु साहिब ने फिर वापस आकर उसी तरह तीन और शीश मांगे। गुरु साहब की मांग पूरी करने के लिए बिदर के भाई साहिब चंद, जगन्नाथपुरी के भाई हिम्मत राय और द्वारिका के भाई मोहकम चंद आगे आए। कुछ समय बाद गुरु गोबिंद सिंह केसरिया वस्त्रों में सजे उन पांचों सिखों को लेकर आए। गुरु साहब ने लोहे के बाटे में पानी और बताशे डाल कर खंडे से तैयार अमृत उन पांचों सिखों को पिलाया और कहा कि ये सभी अब सिंह बन गए हैं। मान्यता है कि गुरु गोबिंद सिंह के पंज प्यारों को स्वयं गुरु जी द्वारा ही कुछ अधिकार प्रदान किए गए थे। 

गुरु साहिब ने खालसा की स्थापना की घोषणा की और सिखों से कहा कि वे भी अमृत पान कर पांच ककार धारण करें और सिंह के नाम से जाने जाएं। बैसाखी को खालसा पंथ की स्थापना के रूप में मनाया जाता है।

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