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इतावली जहाज मामले से रावल को हटाया जाए: केरल

केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने अतिरिक्त महाधिवक्ता हरिन रावल को सर्वोच्च न्यायालय में दिए गए बयान पर उन्हें इतावली नाविक मामले से हटाने की मांग की है। रावल ने शुक्रवार को कहा था कि चूंकि गोलीबारी भारतीय जल सीमा के बाहर हुई थी इसलिए राज्य सरकार के पास इतावली जहाज को हिरासत में लेने का अधिकार नहीं था।

मुख्यमंत्री कार्यालय से शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि चांडी ने केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद को फैक्स भेजकर रावल को मामले से हटाने की मांग की है।

चांडी ने पत्र में कहा, ''हमने महान्यायवादी को मामला सौंपने का निवेदन किया है और इस बात की जांच की जानी चाहिए कि शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में रावल द्वारा दृष्टिकोण क्यों बदला गया?''

इससे पहले चांडी ने शनिवार को पार्टी के कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में रावल का बयान राज्य सरकार के नजरिए से भिन्न है और यह केंद्र एवं राज्य सरकार का विचार भी नहीं है।

उन्होंने कहा, ''हमने केंद्र सरकार से चर्चा की। हमने शुक्रवार को न्यायालय में जो कहा वह केंद्र सरकार का नजरिया नहीं था। केंद्र का भी नजरिया वही है जो हमारा है।''

रावल ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में कहा था कि जब इतावली जहाज से फायरिंग हुई तब वह भारतीय जल सीमा (12 समुद्री मील) से बाहर था। इसके बाद केरल सरकार विपक्षियों के निशाने पर आ गई थी।

केरल के अलपुझा तट पर इतावली जहाज एम.वी. एनरिका लेक्सी के दो सुरक्षाकर्मियों मैसिमिलानो लैटोरे एवं सार्जेट सेल्वाटोरे द्वारा 15 फरवरी को की गई फायरिंग में अजेश बिंकी एवं गिलेस्टाइन नामक दो भारतीय मछुआरे मारे गए थे।

राज्य सरकार ने अगली सुनवाई से रावल को हटाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करने का फैसला किया है।

केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने त्रिचूर में इस आरोप को खारिज किया कि बाहरी दबाव में आकर केंद्र सरकार ने अपना दृष्टिकोण बदला है।

मोइली ने कहा, ''शुक्रवार को न्यायालय में जो भी कहा गया था वह केंद्र सरकार का नहीं बल्कि व्यक्तिगत विचार था।''

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिव पिनरई विजयन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि इन सबसे कांग्रेस पार्टी एवं इटली के बीच सम्बंधों की पुष्टि होती है।

उन्होंने कहा, ''इस मामले में अत्यधिक विलम्ब हुआ क्योंकि फायरिंग के कुछ दिनों बाद ही पुलिस जहाज पर पहुंच सकी। इस दौरान हो सकता है कि महत्वपूर्ण सबूत नष्ट कर दिए गए हों।''

इस मामले की अगली सुनवाई 3० अप्रैल को है और राज्य सरकार के अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय में उपस्थित होंगे।

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