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युगल मुकाबलों के प्रति रवैया बदलना होगा: ज्वाला, अश्विनी

युगल मुकाबलों के प्रति रवैया बदलना होगा: ज्वाला, अश्विनी

राष्ट्रमंडल खेल 2010 में स्वर्ण पदक और विश्व चैम्पियनशिप 2011 में कांस्य पदक जीतने वाली ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा का मानना है कि भारतीय बैडमिंटन में एकल की तरह युगल को भी पर्याप्त अहमियत देने की जरूरत है और इसके लिए लोगों के रवैये में बदलाव करना होगा।

लंदन ओलंपिक 2012 के बाद ज्वाला और अश्विनी की जोड़ी टूट चुकी है और अब ये दोनों कल से शुरू हो रही इंडियन बैडमिंटन लीग में एक दूसरे के खिलाफ खेलती नजर आएंगी।
 भारत के युगल के गिरते स्तर के बारे में पूछने पर ज्वाला ने यहां वोडाफोन आईबीएल के ट्राफी के लांच के बाद कहा कि हमें कोर्ट के अंदर और बाहर युगल के प्रति लोगों के रवैये में बदलाव करने की जरूरत है। युगल को लोकप्रिय बनाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं हुए हैं और कुछ बदलाव करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि युगल मुकाबलों को अधिक गंभीरता से लेने की जरूरत है जबकि हमें युगल विशेषज्ञ तैयार करने होंगे जिससे वर्ग को अधिक लोकप्रिय बनाया जा सके। साइना ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैम्पियनशिप में मेरे और अश्विनी के पदक जीतने के बावजूद हमें प्रायोजक जुटाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा जिससे पता चलता है हमारे देश में युगल को काफी महत्व नहीं दिया जाता।

अश्विनी ने भी ज्वाला के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि युगल को अधिक अहमियत देने और इस पर अधिक ध्यान लगाने की जरूरत है। युगल खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें प्रेरित किए जाने की जरूरत है। पुरुष युगल, महिला युगल और मिश्रित युगल सभी स्पर्धाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

 

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