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शायर फिराक गोरखपुरी की पुण्यतिथि मनाई गई

उत्तर प्रदेश के जौनुपर जिले में पवांरा के सरावां स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर शनिवार को हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी एवं लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने उर्दू के महान शायर फिराक गोरखपुरी की 30वीं पुण्यतिथि मनाई।
 
इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर मोमबत्तियां व अगरबत्तियां जलाईं तथा दो मिनट का मौन रखकर स्वतंत्रता सेनानी एवं उर्दू के प्रसिद्ध शायद फिराक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

समारोह को सम्बोधित करते हुए लक्ष्मीबाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि फिराक ने विद्यार्थी जीवन से ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर देश की आजादी के लडाई में भाग लेना शुरू कर दिया था।
 
उन्होंने कहा कि जब फिराक साहब उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद गए तो उनकी मुलाकात पण्डित जवाहर लाल नेहरु से हुई। नेहरु जी ने उन्हें कांग्रेस कार्यालय का सचिव बना दिया लेकिन उनका ध्यान तो साहित्य की दुनिया में लगा था। वह पहले कानपुर और फिर आगरा में अंग्रेजी के अध्यापक बने और बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर बन गए। शिक्षण कार्य के बाद वह उर्दू में शायरी करते थे। उन्होंने अपनी शायरी के जरिए उर्दू को नई ऊंचाइयां दीं।

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