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नई पारी के लिये तैयार हैं जसपाल

अपने जमाने के दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा भारतीय जूनियर टीम के कोच के रूप में अपनी नई पारी के लिये तैयार हैं। वह इसे अपने लिये बड़ी चुनौती मानते हैं लेकिन उन्हें सफलता हासिल करने का पूरा विश्वास है।

हिरोशिमा एशियाई खेल 1994 और दोहा एशियाई खेल 2006 में भारत की शान रहे राणा को भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने जूनियर पिस्टल टीम का कोच नियुक्त किया है। देहरादून में जसपाल राणा इंस्टीटयूट एंड टेक्नोलोजी में 36 वर्षीय राणा को कोचिंग देने का अनुभव है लेकिन फिर भी वह अपनी इस नई भूमिका को लेकर काफी उत्साहित हैं।

राणा ने एक साक्षात्कार में कहा कि यह मेरे लिये बड़ी चुनौती है लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि मैं परिणाम हासिल करूंगा। मुझे पहले से आभास था कि कोच के लिये मेरे नाम पर विचार किया जा रहा है लेकिन कल ही मुझे अपनी नियुक्ति के बारे में पता चला।

एनआरएआई के रवैये पर कई बार सवाल उठाने वाले राणा को लगता है कि चीजें अब भी व्यवस्थित नहीं हैं और उनका पहला काम टीम को संगठित करना होगा।

उन्होंने कहा कि यदि हम असंगठित रहते हैं तो फिर बेहतर सुविधाओं के बावजूद अच्छे परिणाम हासिल नहीं किये जा सकते हैं। व्यवस्थित होना बहुत जरूरी है और मेरा पहला काम भी यही रहेगा। सरकार पैसा खर्च कर रही है, संघ (एनआरएआई) सुविधाएं दे रहा है लेकिन बच्चों को अच्छे स्कूल में भर्ती कराना और उस पर पैसा खर्च करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। इसके लिये व्यवस्थित होना और सभी को अपनी जिम्मेदारी समझना जरूरी है।

राणा अभी तक युवा निशानेबाजों से ज्यादा परिचित नहीं हैं लेकिन वह कुछ ऐसे निशानेबाज तैयार करने के लिये प्रतिबद्ध हैं जो भविष्य में ओलंपिक खेलों जैसी बड़ी प्रतियोगिता में देश का नाम रोशन कर सकें।

उन्होंने कहा कि मुझे जो टीम दी जाएगी, मैं उसमें से ही खिलाड़ियों को तराशने का काम करूंगा। पहले कोच नहीं होते थे लेकिन आज प्रत्येक स्पर्धा के लिये कोच रखा जाता है। किसी भी खिलाड़ी के लिये जरूरी है कि वह अपने बेसिक्स को अच्छी तरह समक्षे। आपके पास सुविधाएं हैं लेकिन आपके बेसिक्स क्लीयर नहीं हैं तो परेशानी होती है।

राणा लंबे समय से एनआरएआई की कार्यप्रणाली के कटु आलोचक रहे हैं। इस धुरंधर निशानेबाज से जब पूछा गया कि क्या एनआरएआई से जुड़ने के बाद उनका रवैया बदल जाएगा, उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी उन्हीं चीजों का विरोध किया था जो गलत थी। राष्ट्रीय कोच होने का मतलब यह नहीं है कि जो गलत होगा मैं उसको चुपचाप सहन करता रहूं। मैं गलत काम का अब भी विरोध करूंगा। सरकार और महासंघ यदि सकारात्मक राह पर चलते हैं तो मैं उनका साथ दूंगा।

राजनीति में भी कदम रखने वाले राणा कोच बनने के बावजूद निशानेबाजी और राजनीति को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मैं शूटिंग जारी रखूंगा। मैं फिलहाल किसी चैंपियनशिप में भाग नहीं ले रहा हूं क्योंकि कुछ राजनीतिक कामों के कारण अभी थोड़ा थका हुआ हूं लेकिन मुझे जब भी मौका मिलेगा मैं आपको खिलाड़ी के रूप में भी रेंज पर नजर आउंगा।

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