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टाटा के युवाओं ने बनाया कम दाम का वाटर प्यूरीफायर

टाटा स्टील के युवा प्रशिक्षुओं ने देश के गरीबों को शुद्ध पानी पिलाने के लिए पारस वाटर प्यूरीफायर विकसित किया है। इस प्यूरीफायर को बनाने में महज 165 से 195 रुपये की लागत आ सकती है।

सबसे अच्छी बात यह है कि इससे साफ होने वाला पानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुरूप शुद्ध होगा। इतना ही नहीं, हर महीने इस वाटर प्यूरीफायर के पर महज 50 पैसे ही खर्च करने होंगे।

टाटा स्टील के युवाओं की टीम ने इसमें कार्बन बार के रूप में पहले लेयर पर नारियल का छिलका, दूसरे लेयर में आयरन पिलेट, तीसरे लेयर में केले का सूखा छिलका और चौथे लेयर में नारियल के ऊपरी हार्डकोर को जलाकर बनाया हुआ चारकोल डाला है।

इस वाटर प्यूरीफायर के उपभोक्ता को हर महीने मात्र 50 पैसे खर्च कर केले के छिलके का लेयर बदलना होगा। टाटा स्टील में शावक नानावती टेक्निकल इंस्टीट्यूट के चीफ संदीप धीर ने कहा, इस वाटर प्यूरीफायर के पेटेंट के लिए आवेदन किया गया है।

अगर पेटेंट मिल जाता है तो यह टाटा केमिकल की ओर से दो वर्ष पूर्व बाजार में उतारे गए सबसे सस्ते वाटर प्यूरीफायर से 9 गुना सस्ता होगा। यह प्यूरीफायर आर्सेनिक और शीशा की मात्र वाले पेयजल क्षेत्रों के लिए सबसे ज्यादा लाभप्रद है।

इसे ध्यान में रखते हुए टाटा स्टील ने इसका प्रयोग उड़ीसा के जाजपुर क्षेत्र  में करने जा रही है, जहां के पानी में आर्सेनिक और शीशे की मात्र बहुत ज्यादा है। प्रयोगशाला में जांच से पता चला है कि पारस के जरिए आर्सेनिक युक्त पानी 95 प्रतिशत और शीशे को 94 प्रतिशत तक अलग किया जा सकता है।

टीम के सदस्य
इंद्रजीत गिरि, रोहित मिश्र, श्रेनिक जैन, योगी श्रीवास्तव, विवेक कुमार शर्मा, आनंद अंकित सिंघानिया और आनंद प्रकाश।

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