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प्रगति में प्रबंधन और यूनियन समान भागीदारः रतन टाटा

टाटा स्टील के कर्मचारी कंपनी को अपना मानते हैं। यहां अन्य जगहों से यह बड़ा अंतर है। प्रबंधन यहां यूनियन के साथ पार्टनरशिप में काम करता है। प्रबंधन और यूनियन कंपनी की प्रगति में समान रूप से भागीदार हैं।

टाटा स्टील अपने कर्मचारियों और सीनियर सिटीजन की समृद्धि और खुशिहाली की सोच आगे भी जारी रखेगा लेकिन टाटा स्टील यूरोप में यह कल्चर नहीं है। वहां भी यह कार्यसंस्कृति होनी चाहिए।

उक्त बातें टाटा उद्योग समूह के चेयरमैन रतन नवल टाटा ने शनिवार को संस्थापक दिवस पर टाटा वर्कर्स यूनियन की दोनों यूनिट के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहीं।
रतन टाटा ने कहा कि टाटा स्टील देश की नंबर वन और विश्व की छठी सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनी है।

इस सफलता में यूनियन और कर्मचारियों की भूमिका सराहनीय है। मेरे उत्तराधिकारी साइरस भी इन्हीं बातों पर विश्वास करेंगे। साइरस मिस्त्री ने सिर हिलाकर उनकी बातों को स्वीकार भी किया। वे भी इस परंपरा को आगे ले जाएंगे ताकि कंपनी का नाम और रोशन होगा।

रतन टाटा ने कहा कि जिस तरह जेआरडी के बाद वे कंपनी को नई ऊंचाई पर ले गए, साइरस भी उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कंपनी को और ऊंचाई देंगे। यह तभी संभव हो पाएगा जब प्रबंधन और यूनियन के बीच मधुर संबंध रहेगा।

मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार चाहता हूं: साइरस मिस्त्री
टाटा उद्योग समूह के डिप्टी चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने यूनियन पदाधिकारियों को अपने संबोधन में कहा कि जमशेदपुर उनके लिए फाउंटेन की तरह है। जमशेदपुर से उनका दिल से रिश्ता है। पिछले दो दिनों के प्रवास में यह शहर मेरे दिल में बस गया है। वे पहले भी जमशेदपुर आए हैं।

उन्होंने कहा कि वे कर्मचारियों के क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार चाहते हैं। जमशेदपुर टाटा घराने की नींव है। शहर के विकास के लिए टाटा स्टील की सोच जारी रहेगी और शहर का विकास भी जारी रहेगा। उन्होंने यूनियन पदाधिकारियों को अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में भी बताया और कहा कि वे मूलत: सिविल इंजीनियर हैं।

हम हड़ताल में विश्वास नहीं करते: रघुनाथ पांडेय
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि रतन टाटा जब भी शहर आते हैं, यूनियन जरूर आते हैं। यह उनकी विशेषता है। उन्होंने कहा कि अन्य कंपनियों में यह परंपरा नहीं है, जिसका चेयरमैन यूनियन को समय देता हो।

उन्होंने कहा कि गोपाल हेरिटेज के निर्माण में प्रबंधन का काफी योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रबंध निदेशक एचएम नेरुरकर का काफी सहयोग रहा है। एएम मिश्र और जेनी शाह ने भी काफी सहयोग किया है।

उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षो से प्रबंधन और यूनियन के बीच काफी मधुर संबंध रहे हैं। हमारे पुरखों ने यह सीख दी है कि हड़ताल कोई हल नहीं है। ज्वाइंट कंसल्टेशन और वर्क टू गेदर की अवधारणा के कारण हमें यह उपलब्धि हासिल हुई है।

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