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अगला भारतीय चंद्र अभियान रूस पर निर्भर : इसरो प्रमुख

भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख ने रविवार को कहा कि चीन के साथ असफल अंतर ग्रहीय अभियान के बाद देश का अगला चंद्र अभियान रूस के निर्णय पर निर्भर करेगा। आज ही इसरो ने अपने 100वें अभियान सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन ने पत्रकारों से कहा, ''चीन के साथ अंतरग्रहीय अभियान विफल हो जाने के बाद रूस इसकी समीक्षा कर रहा है। चंद्रयान-2 के लिए रूस ही हमें लैंडर (चांद की सतह पर उतरने के लिए यान) उपलब्ध करा सकता है।''

उन्होंने कहा, ''भारत लूनर आर्बिटर एवं रोवर का निर्माण करेगा। रूस कह चुका है कि वह समीक्षा के बाद निर्णय लेकर हमारा साथ देगा।''

देश का चंद्रयान-2 अभियान 2014 में भूसमकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलएवी) द्वारा भेजना प्रस्तावित है।

राधाकृष्णनन ने कहा कि इसरो रॉकेट के साथ लूनर आर्बिटर एवं रोवर तैयार करेगा। हालांकि राधाकृष्णनन ने चंद्रयान अभियान की देरी पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

देश के 100वें अंतरिक्ष अभियान के तहत ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी)फ्रांस एवं जापान के उपग्रहों को लेकर रविवार सुबह 9.51 बजे अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ।

इस रॉकेट के साथ 715 किलोग्राम का फ्रांसीसी उपग्रह स्पॉट 6 जा रहा है जो पीएसएलवी से प्रक्षेपित किया जाने वाला अबतक का सबसे भारी विदेशी उपग्रह है। दूसरी तरफ जापानी उपग्रह का वजन 15 किलोग्राम है।

इसरो अब इस सफलता के बाद अगले साल जाने वाले मंगल अभियान के लिए तैयारी कर रहा है।

राधाकृष्णनन ने कहा कि अगस्त 2010 से इसरो मंगल अभियान का अध्ययन कर रहा है और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में इस अभियान को मंजूरी दी है।

राधाकृष्णनन ने प्रक्षेपण केंद्र पर सुविधाओं के विस्तार पर कहा कि इसरो दूसरे रॉकेट असेम्बलिंग यूनिट की स्थापना की योजना बना रहा है।

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