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फैसला आते ही नम हुईं आंखें

आईपी विश्वविद्यालय के छात्रों की याचिका को कोर्ट ने किया खारिज

आईपी विश्वविद्यालय के दजर्नों छात्र दिल्ली हाई कोर्ट में खड़े थे। सभी के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई पड़ रही थीं। इसी दौरान जानकारी मिली कि छात्रों की तरफ से दाखिल याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह बात पता चलते ही कई छात्रों की आंखे नम हो गई। कुछ छात्राएं तो खुद को रोने से रोक ही नहीं पाईं। याचिका खारिज होने से इन छात्रों का एक साल खराब हो गया है। बड़ी आस लेकर इन छात्रों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन इनके हाथ निराशा ही लगी। अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प ही इन छात्रों के सामने बचा है।

कोर्ट में जमा सौ से अधिक छात्र-छात्राएं विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के हैं। इनमें ज्यादातर बीटेक के दूसरे वर्ष के छात्र हैं। कुछ प्रथम वर्ष के विद्यार्थी भी इनमें शामिल हैं। इनको फेल हो जाने के बाद अगले सत्र में प्रमोट नहीं किया गया था। विश्वविद्यालय की इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए छात्रों ने याचिका दायर की थी। याचिका खारिज होने के बाद छात्र दुखी होकर आपस में बातें करने लगे। एक छात्र ने कहा कि समझ में नहीं आता माता-पिता को अब क्या जवाब देंगे। एक साल बर्बाद होने से पूरा करियर भी प्रभावित होगा। फैसले से निराश कुछ छात्र तो इतने ज्यादा परेशान हुए कि बाहर निकलकर एक कोने में बैठे नजर आए। बीटेक के कई छात्रों ने कहा कि माता-पिता अब उन्हें पढ़ाई छोड़ने के लिए कह देंगे।

एसएमएस करके शुरू की कानूनी जंग
छात्रों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया, लेकिन वकील आदि पर होने वाला खर्च कहां से आएगा, यह सबसे बड़ी समस्या थी। इस कानूनी लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले बीटेक के छात्र अनुभव, राकेश व अन्य ने विश्वविद्यालय परिसर में पहले उन छात्रों के बारे में पता करना शुरू किया जो फेल हो गए थे। जब कुछ छात्र इस मसले पर एक हुए तो उन्होंने एक दूसरे का मोबाइल नंबर लेकर कोर्ट का दरवाजा खटाखटाने के लिए एसएमएस के जरिए छात्रों को एक साथ जमा किया। इसके बाद छात्रों ने हाईकोर्ट में वकील की फीस देने के लिए आपस में चंदा किया।

निराश हैं सभी
बीटेक के एक छात्र ने कहा कि विश्वविद्यालय ने काफी देर से काउंसलिंग की थी, जिसकी वजह से छात्रों को परीक्षा की तैयारी का मौका नहीं मिला। छात्र दो से चार नंबरों से फेल हो गए।

बीटेक के राकेश मीना ने कहा कि हम इस फैसले से निराश हैं, करियर खराब हो जाएगा। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करे। फैसले का अध्य्यन कर सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार करेंगे।

विश्वविद्यालय बच्चों को अंक देने में भेदभाव कर रहा है। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
गीता लूथरा, वरिष्ठ अधिवक्ता (छात्रों की वकील)

मेहनत करें छात्र
आई पी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डी. के. बंधोपाध्याय ने कहा कि सभी छात्रों को चाहिए कि वह वापस पढ़ाई का रुख करें। अगर सभी छात्र थोड़ी मेहनत और करेंगे तो अवश्य ही अच्छे नंबर प्राप्त कर सकेंगे। छात्रों को विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग व बाकी विषयों की तकनीकी शिक्षा लेकर उसका सदुपयोग अपने भविष्य को संवारने के लिए करना चाहिए। विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार विश्वविद्यालय व इससे जुड़े कॉलेजों के करीब 350 छात्र फेल हुए हैं। वहीं छात्रों का कोर्ट में दावा रहा है कि कुल 5500 छात्र इससे प्रभावित हैं। इसके अलावा इस तरह के मामलों में अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। माता-पिता स्कूल तक तो बच्चों के पीछे पढ़ाई को लेकर कड़ा रुख रखते हैं, लेकिन कॉलेज में जाने के बाद वह इस बात पर ध्यान नहीं देते। विश्वविद्यालय छात्रों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था कर रहा है। अगर किसी छात्र को किसी तरह की कोई दिक्कत है तो वह विश्वविद्यालय के पास जा सकता है।

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