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सीरीयल किसर से चिढ़ता हूं: इमरान

वंसअपान ए टाइम इन मुंबई, दिल तो बच्चा है जी, मर्डर 2 और अब डर्टी पिक्चर, अभिनेता इमरान खान ने भले ही अपनी सीरीयल किसर की एक इमेज बनायी हो, इसमें कोई संदेह नहीं है कि अब वह सिर्फ भट्ट कैंप के हीरो नहीं रहे। इधर उन्होंने लगातार कई ऐसी फिल्मों में काम किया है, जो बाहर के निर्माताओं की थीं।

डर्टी पिक्चर में काम करने से पहले विद्या आपके सीरियल किसर इमेज से घबरा क्यों गयी थीं?
उन्होंने तो ऐसा मुझसे ऐसा कभी नहीं कहा। फिल्म के अपने-अपने रोल को हमने पूरा एंजॉय किया है। पहले दिन शूटिंग के बाद ही उन्होंने मुझसे मजाक में पूछा था, तुम तो एक अच्छे एक्टर हो, फिर यह इमेज का क्या चक्कर। मै हंस पड़ा था। वह भी इस बात को जानती है कि यह इमेज का सारा चक्कर मीडिया चलाता है।

पर आप तो इस इमेज का पूरा लाभ उठा रहे हैं?
मैं सिर्फ अपनी परफारमेंस का लाभ उठा रहा हूं। यदि मेरा कुछ स्टाइल दर्शकों को पसंद आ रहा है, तो उसे बार-बार करने में मुझे कोई गुरेज नहीं है। मगर मैं इस बात का यकीन दिलाना चाहता हूं कि मेरे इनमें भी मेरे परफारमेंस में आपको कोई दोहराव नजर नहीं आयेगा।

डर्टी पिक्चर करने की कोई खास वजह?
यह फिल्म साउथ की बोल्ड बाला अभिनेत्री सिल्क स्मिता पर केंद्रित है। वाकई में यह एक जीवंत किरदार है। मैं इसमें एक निर्देशक का रोल कर रहा हूं, बहुत ही जीवंत किरदार है यह। सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्मों में मेरे अब तक के निभाए किरदारों से बिल्कुल जुदा है।

क्या यहां भी सीरियल किसर की इमेज आपका पीछा करेगी?
ओह, इस सीरियल किसर शब्द से मैं अब चिढ़ने लगा हूं। न जाने लोग किस तरह का नाम दे देते हैं। फिल्म के सीन और सिचुएशन के मुताबिक यदि किस सीन करना है, तो उससे मैं कैसे बच सकता हूं। यह तो हमारे अभिनय का एक अंग है। हमारे हिंदी फिल्मों में चुंबन कोई नयी बात नहीं है। आमिर खान ने भी तो कितनी फिल्मों में अपनी हीरोइन के साथ किस सीन किया है। मल्लिका शेरावत ने तो ख्वाहिश फिल्म में 17 किस का रेकॉर्ड बनाया था। ऐसे में मात्र आठ-नौ फिल्मों में काम करके मैं कैसे सीरियल किसर बन गया। बहरहाल अब मेरा मीडिया से एक ही अनुरोध है डर्टी पिक्चर के बाद मेरी नई इमेज की भी तारीफ करें।

मिलन लूथरिया आप पर कुछ ज्यादा मेहरबान हैं?
डर्टी पिक्चर के बाद मैं शायद मिलन की अगली फिल्म भी करूं। उनके साथ वंस अपान ए टाइम इन मुंबई करके मुझे बहुत अच्छा लगा। वह जिस तरह के विषय पर फिल्म बनाने का साहस कर रहे हैं, वह वाकई में काबिले तारीफ है।

इसमें भी आपका लुक काफी बदला-बदला-सा नजर आ रहा है?
मिलन ने इसमें कोशिश की है कि फिल्म के सारे किरदार एक जीवंत लुक का अहसास कराएं। अब यह किरदार किस जीवित व्यक्ति के करीब लगते हैं, यह बताना ठीक नहीं होगा। बस, आप इतना ही जान लीजिए कि यह सब कुछ फिल्म की कहानी की वजह से संभव हुआ है। मिलन इसके सारे किरदार को बिल्कुल उनके असल अंदाज में पेश करना चाहते थे।

इधर आप भट्ट कैंप का सम्मोहन काफी हद तक छोड़ने में सफल हुए हैं?
मैं बहुत दिनों से भट्ट कैंप के बाहर की फिल्में कर रहा हूं। शायद उन फिल्मों के निर्देशकों के नाम कुछ ज्यादा बड़े नहीं थे, इसलिए इस तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। अब जब से मैंने मधुर, मिलन आदि निर्देशकों की फिल्में करनी शुरू की हैं, लोग कहने लगे हैं कि मैं भट्ट कैंप से बाहर निकल आया हूं। मुङो लगता है ऐसी बातों का कोई मायने नहीं है। क्योंकि मैं इन दिनों भी बाहर के निर्देशकों के साथ-साथ भट्ट कैंप की तीन फिल्में जन्नत-2, मर्डर-2 और राज-2 भी कर रहा हूं।

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