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सेना ने किया था प्रोटोकॉल का उल्लंघन?

एक अंग्रेजी अखबार ने दावा किया है कि 16 और 17 जनवरी की रात भारतीय थलसेना की दो टुकड़ियां केंद्र सरकार को बिना बताए दिल्ली की तरफ बढ़ रही थीं और राजधानी के बेहद करीब आ गईं थीं।
 
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार इनमें एक टुकड़ी 33वीं आर्म्ड डिवीजन की मेकेनाइज्ड इनफैन्ट्री थी, जो हिसार से दिल्ली की तरफ बढ़ रही थी और ठीक उसी दौरान आगरा से भी 50 पैरा-ब्रिगेड की एक टुकड़ी दिल्ली की तरफ बढ़ रही थी।

रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा है कि यह सेना का रुटीन रिहर्सल था। उन्होंने यह भी कहा है कि जनरल वीके सिंह के उम्र विवाद से इसका कोई लेना-देना नहीं था।
 
अखबार के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय या केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को सेना की टुकड़ियों के इस कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यह वाकया 16 जनवरी 2012 का है, यानी उसी दिन थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने अपनी जन्मतिथि के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मुद्दे के चलते सरकार और सेना के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे।

यही वजह है कि सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली की तरफ बढ़ने की खबर मिलने पर सरकार बेहद सतर्क हो गई थी। खबर मिलते ही पूरे मामले की जानकारी रक्षा मंत्री को दी गई। सरकार फौरन हरकत में आई और सेना की टुकड़ियों के मूवमेंट में देर करने के लिए टेरर अलर्ट भी जारी किया गया।
 
अखबार के मुताबिक, 17 जनवरी की सुबह इस मामले की जानकारी प्रधानमंत्री को भी दी गई थी। अखबार ने यह भी दावा किया है कि इसी वजह से रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा को मलेशिया का दौरा बीच में रद्द करके वापस बुला लिया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने भारत लौटने के बाद देर रात अपना ऑफिस खोला और डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. चौधरी को तलब करके उनसे पूछा कि क्या हो रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने रक्षा सचिव को बताया कि ये रूटीन रिहर्सल है, जिसका मकसद कोहरे के दौरान तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को जांचना है।
 
अखबार के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी से कहा गया कि दोनों टुकड़ियों को फौरन वापस भेजा जाए। कुछ ही घंटों के भीतर दोनों ही टुकड़ियों को वापस भेज दिया गया।

सेना की एक टुकड़ी उस वक्त बहादुरगढ़ के एक इंडस्ट्रियल पार्क में रुकी हुई थी और पैरा ब्रिगेड की टुकड़ी, जो आगरा से दिल्ली की ओर बढ़ रही थी वह पालम के करीब तक आ चुकी थी। अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि उस दिन सरकार के भीतर भ्रम और बेचैनी का माहौल था।
 
अखबार के मुताबिक, सेना ने इस बारे में जो स्पष्टीकरण दिया है, उस पर भरोसा किया जा सकता है, फिर भी यह सवाल उठता है कि एनसीआर में सेना के किसी भी मूवमेंट की पूर्व सूचना रक्षा मंत्रालय को दिए जाने के प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया?

सेना का रुटीन रिहर्सल था तो रक्षा मंत्रालय को क्यों नहीं बताया गया? वायुसेना को कोई जानकारी क्‍यों नहीं दी गई थी?

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