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संयुक्त राष्ट्र सुधार में विलंब खतरनाक: भारत

भारत ने कहा है कि यदि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को मौजूदा वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बनाना है, तो उसका सुधार और विस्तार आवश्यक है। भारत ने चेतावनी भी दी है कि इसमें किसी भी तरह का विलंब हमारे लिए खतरनाक होगा।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को इस मुद्दे पर आठवें दौर की अंतरसरकारी बातचीत में कहा कि नए उत्साह के साथ सुरक्षा परिषद का जल्द सुधार किया जाना चाहिए और उसे आवश्यकरूप से लागू किया जाना चाहिए।

पुरी ने कहा कि भारत, सुरक्षा परिषद का ढांचागत सुधार चाहता है, जो वैश्विक शासकीय ढांचे में विश्वसनीय सुधारों की आवश्यकता पूरी करे। इस तरह के बदलाव की जरूरत दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।

पुरी ने कहा कि वास्तव में, यदि हम यह भी कहें कि आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष), विश्व बैंक जैसे अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में ठोस विकास देखे जा रहे हैं। तो भी सुरक्षा परिषद के सुधार में विलम्ब कर हम अपने लिए खतरा ही पैदा कर रहे हैं।

इसके पहले जी4 की तरफ से संयुक्त बयान जारी करते हुए पुरी ने कहा कि बैठक से यह स्पष्ट हुआ है कि बहुसंख्यक सदस्य सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार चाहते हैं।

पुरी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर को नए स्थायी और अस्थायी सीटों के लिए मापदंड की पहचान करने के लिए सिद्धांत के रूप में स्वीकार कर लिया गया है। हम मानते हैं कि विस्तारित परिषद में कुल 25-26 सदस्य होने चाहिए। पुरी ने कहा कि ज्यादातर सदस्य परिषद की कार्यपद्धति में सुधार की मांग भी करते हैं।

पुरी ने कहा कि इस बारे में भी सहमति बन रही है कि सुधार तभी पूरा होगा, जब वीटो के सभी पक्षों व रूपों को व्यापक रूप से हल किया जाए।

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