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'भारत, श्रीलंका में विशिष्ट अधिकारों की अपेक्षा न करे'

श्रीलंकाई सांसद व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के सलाहकार राजीवा विजेसिन्हा का कहना है कि भारत को श्रीलंका में चीन की मौजूदगी से असहज महसूस नहीं करना चाहिए क्योंकि वहां दोनों देशों के लिए अपार सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत को श्रीलंका में विशिष्ट अधिकार मांगने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

विजेसिन्हा नेपाल जाते हुए बुधवार को यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर भारत को असहज महसूस नहीं करना चाहिए। विजेसिन्हा ने कहा कि हम भारत व चीन दोनों के अच्छे दोस्त हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां दोनों देशों के लिए अपार सम्भावनाएं हैं।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त व प्रोफेसर के तौर पर काम कर चुके विजेसिन्हा ने कहा कि श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति उसे दोनों देशों के लिए आकर्षक बनाती है लेकिन दोनों का ही श्रीलंका में विशिष्ट अधिकारों की अपेक्षा करना समय की बर्बादी है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को चीन द्वारा श्रीलंका में शुरू की जा रही परियोजनाओं को लेकर चिंतित होना चाहिए, तो इस पर उनका कहना था कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने हैम्बैनटोटा बंदरगाह का उदाहरण देते हुए कहा कि हमने पहले भारत के सामने इसके विकास का प्रस्ताव रखा था। जब बात नहीं बनी तो यह काम चीन को दे दिया गया।

हैम्बैनटोटा बंदरगाह जिस इलाके में है, वह श्रीलंका का सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाला क्षेत्र है। आर्थिक विकास के लिए यह बंदरगाह बहुत महत्वपूर्ण होगा। परियोजना के पहले चरण की अनुमानित निर्माण कीमत 36.1 करोड़ डॉलर है। चीन के ईएक्स-आईएम बैंक ने इस राशि का 85 प्रतिशत हिस्सा दे दिया है।

विजेसिन्हा ने कहा कि अब भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसने उत्तर में कांकेसंतुरई बांध पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत को चीन को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।

विजेसिन्हा चाहते हैं कि भारत लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के पूर्व लड़ाकों को छोटे-छोटे कर्ज देने में मदद करे, ताकी वे उद्यमशीलता अपनाकर अपनी जिंदगी दोबारा शुरू कर सकें।

उन्होंने कहा कि हम जल्दी ही भारत से इस सम्बंध में मदद मांगेंगे ताकी 1,000 लाख श्रीलंकाई रुपयों (8,20,000 डॉलर) की राशि कम से कम 1,000 पूर्व लड़ाकों के बीच बांटी जा सके।

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