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रंग, पिचकारी का कारोबार 12,000 करोड़ के पार: एसोचैम

होली के रंग, गुलाल और पिचकारी कारोबार के बढ़ते आंकड़ों को देखकर यह कहा जा सकता है कि महंगाई और आर्थिक नरमी के इस दौर में भी पारंपरिक एवं सांस्कृतिक त्योहारों के प्रति लोगों का आकर्षण कम नहीं हुआ  है।

एक उद्योग मंडल के अनुसार, रंग, गुलाल, पिचकारी एवं अन्य संबंधित सामान का कारोबार इस साल 20 प्रतिशत बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये के पार निकल जाने की संभावना है। एसोचैम के अनुसार, हर्बल तथा सुगंधित रंगों की भारी मांग से अकेले रंग एवं गुलाल का कारोबार ही 4,500 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है।

होली कारोबार के बारे में विश्लेषण जारी करते हुए एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा कि प्रचार-प्रसार के कारण लोग खराब गुणवत्ता, मिलवटी, सिंथेटिक एवं खतरनाक रसायन युक्त रंगों को लेकर लोग सचेत हुए हैं। इससे हर्बल एवं पर्यावरण अनुकूल रंगों की मांग बढ़ी है।

रावत ने कहा कि इस साल पिचकारी, कलर स्प्रे, रंग भरे गुब्बारे समेत अन्य सामान का कारोबार 7,500 करोड़ रुपये पहुंच जाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि बाजार में चीनी पिचकारियों की धूम है। गुणवत्ता के अभाव के बावजूद बच्चों और युवाओं में इसकी मांग काफी है। इसका कारण पिचकारियों एवं अन्य सामानों का आकर्षक होना तथा बेहतर रूप सज्जा है।

हर्बल रंग तथा चीनी पिचकारियों की मांग एवं आपूर्ति के बारे में पता लगाने के लिये एसोचैम के सोशल डेवलपमेंट फाउंडेशन ने फरवरी के दौरान दिल्ली, कानपुर, इलाहाबाद, ब्रज मंडल (आगरा, हाथरस, मथुरा तथा वंदावन), लखनऊ तथा पटना में सर्वे किया।

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  • Web Title:रंग, पिचकारी का कारोबार 12,000 करोड़ के पार: एसोचैम