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होबो का हुड़दंगी पाता है पुरस्कार

होली का त्योहार भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अलग-अलग समय में बड़े उमंग और उत्साह से मनाया जाता है। वैसे विदेशो में ऐसे आयोजनों के पीछे अलग-अलग कथाएं और परंपराएं प्रचलित रही हैं। चीन में रंग-पानी से सराबोर होने वाले थ्वेईच्चे का त्योहार ही होली है। इसे वे नव वर्षोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन यहां के लोग सर्वप्रथम बौद्ध मूर्तियों को स्नान कराते हैं। साइबेरिया के बच्चे-युवा हमारे देश की तरह घर-घर लकड़ियां एकत्र करते हैं। बाद में उनमें आग लगाकर सभी उसकी परिक्रमा करते हैं। इसी प्रकार जर्मनी में लकड़ियां जलायी जाती हैं। लोग नाचते-गाते और एक-दूसरे पर रंग डालते हैं। स्वीडन और नार्वे के लोग शाम को आग जलाकर परिक्रमा करते हैं। फिर प्रात:काल उत्सव का आयोजन होता है। तिब्बत में भी होली के मौके पर आग की पूजा की जाती है। पोलैंड में होली को आरशिना कहा जाता है। यहां के लोग टोलियां बनाकर शुद्ध प्राकृतिक रंगों से होली खेलते हैं। अमेरिका में होली, होबो नाम से मनायी जाती है। इस दिन होबो की सभा होती है। इसमें तरह-तरह की पोशाकें पहनी जाती हैं। पतलून में एक टांग गायब होती है। कमीज के बटन पीछे लगे होते हैं। एक पैर में जूता नहीं होता। सबसे ज्यादा हुड़दंग करने वाले को पुरस्कार दिया जाता है। मिस्र में होली मार्च के महीने में मनाई जाती है, जिसे वे फालिका कहते है। लोग टोलियां बनाकर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हैं। थाईलैंड निवासी होली से मिलता-जुलता त्योहार सोंगक्रान मनाते हैं। यह अप्रैल के महीने में मनाया जाता है। इस दिन थाई लोग भगवान बुद्ध की मूर्ति के सामने बड़ी श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। मठों में जाकर भिक्षुओं को उपहार देते हैं। उसके बाद खुशबूदार पानी से होली खेलते हैं।

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